भारी बारिश से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में सिरकिला और बुर्फू के ग्लेशियर टूटने लगे हैं। इसके साथ ही उत्तराकाशी में एक बार फिर आपदा जैसे हालात पैदा हो गए है।
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इससे गोरी और इसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। उल्लेखनीय है कि इन नदियों में पानी बढ़ने से शारदा का जलस्तर भी बढ़ जाता है। पानी बढ़ने बाढ़ के हालात पैदा होने का भी डर है।
मुनस्यारी के पूर्व ब्लॉक प्रमुख कुंदन सिंह टोलिया ने मुनस्यारी के एसडीएम को लिखित में सूचित किया है कि सिरकिला और बुर्फू में ग्लेशियर टूटकर खिसकने लगे हैं।
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बढ़ा नदियों का जलस्तर
ग्लेशियर से टूटने से गोरी और इसकी सहायक नदियां लासपा, बिरजू, ल्वा और रालम आदि का जलस्तर बढ़ गया है। चूंकि ये नदियां आगे जाकर शारदा में मिल जाती हैं।
इसलिए इनमें पानी बढ़ने से शारदा का जलस्तर भी बढ़ गया है। टोलिया ने यह भी बताया कि जलस्तर बढ़ने से हाल ही में तोला में गोरी में बना अस्थायी पुल बह गया था।
अब तक पुल का पुनर्निर्माण न होने से आवाजाही में दिक्कत हो रही है। इस संबंध में एसडीएम ने बताया कि ग्लेशियर टूटने की पुष्टि के लिए दल भेजा जाएगा तथा तोला में पुलिया का निर्माण भी जल्द कराया जाएगा।
कई गांवों के लोग घरों में कैद
उत्तरकाशी की असी गंगा घाटी के गांवों में एक बार फिर आपदा जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
सड़क मार्ग से अछूते अगोड़ा, ढासड़ा, दंदालका एवं भंकोली गांव के पैदल रास्ते बीते दिनों हुई बारिश में तबाह हो गए। अब मरीजों और प्रसूताओं को अस्पताल पहुंचाने की समस्या खड़ी हो गई है।
अगोड़ा, दंदालका, ढासड़ा एवं भंकोली गांव को सड़क से जोड़ने के लिए असी गंगा पर पैदल पुल तो बन गया, लेकिन इन गांवों के पैदल रास्ते बीते हफ्ते हुए बारिश से तबाह हो गए।
इस हाल में गांव से सड़क तक पहुंचने के लिए जान का जोखिम होने से ग्रामीण घर गांव में कैद होकर रह गए हैं। इन गांवों का राशन का तीन माह का एडवांस कोटा संगमचट्टी में ही पड़ा है।
बस रास्ते ठीक करा दे सरकार
ग्रामीण तो किसी तरह गांव में गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन मरीजों और गर्भवती महिलाओं को भारी मुसीबतें उठानी पड़ रही है।
बीते मंगलवार को दंदालका गांव के पृथव सिंह को पैरालाइसिस हुआ, तो गांव के राजवीर, राजेंद्र, सुरेश आदि युवकों ने उन्हें भारी जोखिम के साथ स्ट्रेचर पर लादकर किसी तरह जिला अस्पताल पहुंचाया।
अगोड़ा गांव के प्रधान चंद्र लाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य बिंद्रा देवी, संजय पंवार, विक्रम, सुमन पंवार आदि का कहना है कि आपदा के बाद से क्षेत्र में अभी तक हालात नहीं सुधरे हैं।
अधिकारी इन रास्तों से गांव तक पहुंचें तब उन्हें हकीकत का पता चलेगा। प्रशासन से सिर्फ एक ही गुहार है कि आवाजाही के रास्ते दुरुस्त करा दें।
अगोड़ा गांव की भागीरथी एवं सुष्मिता का इसी जुलाई में प्रसव होना है। गांव के रास्ते की बदहाली को देखते हुए परिजनों ने उन्हें पहले ही सड़क मार्ग से लगे उनके मायके भेज दिया है।
कस्तूरी की डिलीवरी अगस्त में है। उसे न मायके भेजने की स्थिति है और न ही अस्पताल पहुंचाने की।
सरकार ने आपदा के दौरान अलग-थलग पड़ने वाले गांवों के लिए तीन माह का एडवांस खाद्यान्न कोटा तो दिया है, लेकिन संगमचट्टी से आगे रास्ता नहीं होने से खाद्यान्न गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। रास्ता खच्चर तो दूर पैदल चलने लायक भी नहीं है। - शिवराम पंवार, सस्ता गल्ला विक्रेता अगोड़ा