स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाया है। सरकार की रोक के बावजूद विभाग ने अटैच कर्मियों की तनख्वाह जारी कर दी गई है। पिछले माह ही सरकार ने मूल तैनाती स्थल पर ज्वाइनिंग ना देने वाले अटैच कर्मियों को वेतन जारी नहीं करने का निर्देश दिया था। इससे पहले कैबिनेट के फैसले के बावजूद कर्मियों का अटैचमेंट समाप्त न करने को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग चर्चाओं में रहा है।
कुछ समय पूर्व राज्य मंत्रिमंडल ने प्रदेश में सभी अटैचमेंट समाप्त कर कर्मियों को मूल तैनाती स्थलों पर ज्वाइन करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कैबिनेट के निर्णय के बाद अन्य विभागों ने तो अटैचमेंट समाप्त कर दिए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा नहीं किया। 11 जुलाई के अंक में अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
इसके बाद सरकार ने तत्काल सभी अटैचमेंट समाप्त करने और मूल तैनाती स्थलों पर ज्वाइनिंग नहीं देने वाले कर्मियों को वेतन जारी न करने के आदेश दिए। इसमें स्पष्ट किया गया कि जो भी कर्मचारी अपने मूल तैनाती स्थल पर ज्वाइनिंग नहीं देगा, उसे जुलाई माह का वेतन नहीं मिलेगा। स्पष्ट आदेश होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक अटैचमेंट समाप्त नहीं किया, उल्टा कर्मियों को तनख्वाह भी जारी कर दी।
पत्र लिखकर दिए तनख्वाह जारी करने के निर्देश
जब अटैच कर्मियों के मूल तैनाती कार्यालय ने उनकी तनख्वाह जारी नहीं की तो स्वास्थ्य महानिदेशालय और सीएमओ कार्यालय की ओर से उन्हें पत्र भेजकर तनख्वाह जारी करने के निर्देश दिए गए। मसूरी चिकित्सालय के एक चिकित्सक दून अस्पताल में और दो स्टाफ नर्स रानीपोखरी अटैच हैं।
अस्पताल के सीएमएस ने नियमों का हवाला देते हुए इनकी तनख्वाह रोक दी। इस पर स्वास्थ्य महानिदेशालय और सीएमओ कार्यालय ने पत्र लिखकर तनख्वाह जारी करने को कहा, जिसके बाद इन्हें वेतन जारी कर दिया गया। वहीं, इस संबंध में शासन का पक्ष जानने के लिए सचिव स्वास्थ्य डा. भूपेंद्र कौर औलख को फोन और एसएमएस किया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
अटैचमेंट समाप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। कुछ लोगों के रिलेक्शेसन के लिए शासन को लिखा गया है। निर्णय न होने तक उन्हें वेतन देने के निर्देश हुए हैं। आगे उच्च स्तर से जो भी आदेश प्राप्त होंगे, उनके अनुसार कार्रवाई होगी।
-डॉ. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक