फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलवायु परिवर्तन से बढ़ीं बीमारियों को ‘वॉक ओवर’

Mon, 05 Dec 2016 10:29 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
doctor
विज्ञापन
जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण प्रदेश में बढ़ रहीं बीमारियों का सामना करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग वॉक ओवर देने की स्थिति में है।
विज्ञापन


उत्तराखंड में क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान लागू हो गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने जो कार्ययोजना बनाई है, वह संसाधनों की कमी के चलते कागजी साबित होगी। दरअसल, विभाग ने कार्ययोजना में दावे तो बड़े-बड़े कर दिए, लेकिन बिना संसाधनों के ये धरातल पर कैसे उतरेंगे इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं हैं। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं न के बराबर हैं।

एक्शन प्लान में स्पष्ट किया गया है कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण विभिन्न प्रकार की इंसेफ्लाइटिस, मलेरिया, डेंगू सरीखे संवाहक जनित रोग, जलजनित रोग और वायु जनित रोगों का हमला तेज हो गया है। सांस तंत्र और हृदय रोगों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मौसम में बदलाव के कारण मनोरोग के मरीजों की संख्या भी बढ़ेगी। जलजनित रोग डायरिया और पेट की दूसरी बीमारियां भी लोगों को चपेट में ले रही हैं।
विज्ञापन


साथ ही तापमान बढ़ने से खाने को संक्रमित करने वाले पैथोजंस सक्रिय हो जाएंगे। फूलों के परागकण, पोर्स समेत अन्य वायु प्रदूषण के घटक एलर्जी डिस्आर्डर, अस्थमा आदि रोग बढ़ा रहे हैं। इस पूरे बदलाव से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग निहत्था है। स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टर नहीं है। दर्जन भर स्वास्थ्य केंद्र एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं। सीएचसी, जिला अस्पतालों में पर्याप्त पैथोलॉजिकल जांचों की सुविधा नहीं है। इसकी वजह से एक्शन प्लान में स्वास्थ्य विभाग ने जो कार्ययोजना दी है, उसे धरातल पर उतारा नहीं जा सकता।
विज्ञापन


स्थिति
- प्रदेश में सिर्फ एक मानसिक रोग चिकित्सालय
- सरकारी क्षेत्र में डाक्टरों के ढाई हजार पद
- 50 फीसदी पदों पर काम कर रहे हैं डाक्टर
- 700 डाक्टरों का अधियाचन लोक सेवा आयोग को भेजा

राष्ट्रीय कार्यक्रम
डाक्टरों के स्वीकृत पद-2690
काम कर रहे 1089 डाक्टर
इनमें 170 संविदा पर
विशेषज्ञों के स्वीकृत पद-439
सेवारत -169
संविदा पर 22

डाक्टरों की कमी पूरी करने के लिए प्रत्येक मंगलवार को वॉक इन इंटरव्यू हो रहे हैं। इसके अलावा मेडिकल कालेजों से पास आउट होने वाले एमबीबीएस के छात्रों को लगाया जाएगा। स्वास्थ्य सेवा की कमियां पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- डा. कुसुम नरियाल, महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य

एक्शन प्लान में स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताएं
- डायग्नोस्टिक सुविधाएं बढ़ाने के लिए पैथोलॉजिकल लैब की व्यवस्था
- ड्रग रिसेस्टेंस और कीटनाशक रिसेस्टेंस की मॉनीटरिंग करना
- पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप से हृदय और गुर्दा रोग यूनिटों का निर्माण
- डेंगू फीवर और जापानी इंसेफ्लाइटिस का सर्वेलांस
- एकीकृत संवाहक प्रबंधन
- मेडिकल, पैरा मेडिकल स्टाफ और फ्रंट लाइन वर्कर की क्षमता निर्माण
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें