चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत गठित वन सुरक्षा दल का मुख्यालय जलालिया से जौनसार बावर क्षेत्र के पहाड़ी अंचलों में शिफ्ट करने की मांग पर वन कर्मचारी संघ से जुड़े कर्मचारियों ने कालसी स्थित डीएफओ कार्यालय में धरना दिया। कर्मचारियों ने मांग पर शीघ्र कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जगतराम जोशी ने कहा की चकराता वन प्रभाग का 90 प्रतिशत वन क्षेत्र कनासर, मोल्टा, देवघार रेंज में आता है। जहां पर वन सुरक्षा दल की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन अपने निजी हितों के लिए इस दल का मुख्यालय जलालिया में स्थापित किया गया है। जहां पर नाम मात्र के जंगल हैं। सचिव सुधीर भट्ट ने कहा कि दल का मुख्य काम जंगलों के अवैध पातन और अवैध खनन से रक्षा करना है। जो तभी संभव है जब इसका मुख्यालय वन क्षेत्रों के बीचों बीच स्थापित हो। कहा कि जब तक सुरक्षा दल का मुख्यालय प्रभाग के उच्च क्षेत्र में स्थापित नहीं होता। उनका आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं, वन संरक्षक यमुना वृत्त जीवन चंद्र जोशी ने कहा कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शन करने वालों में हरपाल नेगी, कृष्ण दत्त ममगाईं, जाकिर खान, जगदीश, संतराम, वीर सिंह नेगी, सत्येंद्र रावत, मनोज कुकरेती, दिनेश सिंह, सुशील, सागर आदि मौजूद रहे।
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पूर्व में भी विवादों में रहा है वन सुरक्षा दल
कालसी। चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत गठित यह वन सुरक्षा दल पूर्व में भी विवादों में रहा है। पूर्व में इस सुरक्षा दल को खनन सचल दल का नाम दिया गया था। जिसे बीते एक वर्ष पूर्व कर्मचारियों के विरोध के बाद मुख्य वन संरक्षक ने भंग कर दिया। दल में शामिल कर्मचारियों को विभाग में अन्य स्थानों पर समायोजित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्देशों के इतर इन कर्मचारियों को फिर से एक वन सुरक्षा दल गठित कर उसमें शामिल कर दिया गया। तब भी कर्मचारियों ने इसका जोर-शोर से विरोध किया था।