मनीष चंद्र भट्ट। 45 साल की उम्र के बाद लोगों में हाईपरटेंशन, मधुमेह, रक्तचाप, हृदय और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। कोरोना का टीका लगवाने के लिए आने वाले लोगों की केस हिस्ट्री (बीमारी का विवरण) इस तथ्य को पुख्ता कर रही है।
कोरोना टीकाकरण का दूसरा चरण गत एक मार्च को शुरू हो चुका है। इसमें 45 से अधिक उम्र वाले लोगों को टीका लगाया जा रहा है। 60 साल से अधिक आयु वाले सीनियर सिटीजन इस चरण में टीका लगवा सकते हैं। जबकि, 45 से 60 साल तक की उम्र वाले उन्हीं लोगों को टीका लगाया जा रहा है, जिन्हें 20 गंभीर बीमारियां हैं। इनमें से हाईपरटेंशन, हाई व लो ब्लड प्रेशर (उच्च व कम रक्तचाप), अस्थमा, ब्रांकाइटिस, एलर्जी जैसे सांस रोग और हृदय संबंधी बीमारियां शामिल हैं। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शुक्रवार को भी 273 लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया। इसमें से 50 से अधिक लोग ऐसे हैं जो इन गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं।
कोरोना के राज्य समन्वयक डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि 45 से 60 साल की उम्र वाले 20 गंभीर बीमारियों से पीड़ित इन लोगों को संबंधित डॉक्टर के प्रमाणपत्र की जांच के बाद ही टीका लगाया जा रहा है।
---
दिनचर्या और खानपान सही रखना जरूरी
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं फिजीशियन डॉ. कुमार जी. कौल ने बताया कि उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, अवसाद, अस्थमा, मधुमेह, गठिया, चिंता, ऑस्टियोपोरोसिस, प्रतिरोधक क्षमता कम होना, धूम्रपान, खराब पोषण, दिल की बीमारी, गुर्दे की बीमारी, कैंसर व भूलने की आदत बढ़ती उम्र के रोग हैं। डॉ. कॉल ने बताया कि दिनचर्या और खानपान को सही रखें। अगर कोई दवा ले रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार, नियमित तौर पर लेते रहें।
----
भ्रम में न रहें, गंभीर बीमारी वालों को टीका लगवाना जरूरी
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल पटेलनगर के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट (सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ) डॉ. जगदीश रावत ने बताया कि इस बात को लेकर कई लोगों में भ्रम है कि 45 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को सरकार द्वारा बताई गई 20 गंभीर बीमारियों में टीका नहीं लगवाना है, यह बिल्कुल गलत है। उम्र के साथ कई लोगों में यह बीमारियां बढ़ने लगती है। लाइफ स्टाइल भी इसकी एक बड़ी वजह है। इसलिए इन लोगों को तो कोरोना का टीका लगवाना बहुत जरूरी है। ताकि, उनमें कोरोना के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित हों और अन्य बीमारियों पर भी संक्रमण का असर न हो।