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हरियाली अमावस्या 2019: बन रहा दुर्लभ संयोग, इस समय पौधरोपण करना होगा शुभ और फलदायी

Thu, 01 Aug 2019 08:39 AM IST
अलका त्यागी विनोद चमोली/अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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सावन की अमावस्या को पर्यावरण संरक्षण का महापर्व हरियाली अमावस्या मनाया जाता है। इस बार अमावस्या तिथि 31 जुलाई और एक अगस्त को दो दिन आने से पर्व की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है।

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लेकिन, ज्योतिषियों के अनुसार उदयकालीन तिथि मान्यतानुसार एक अगस्त को गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में पूजन-अर्चना के बाद पौधरोपण किया जाना शुभ होगा। 

सावन माह के कृष्ण पक्ष को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन हर व्यक्ति को एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए ही हरियाली अमावस्या के दिन पौधरोपण करने की प्रथा चली आ रही है।

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इस समय तक करें पौधरोपण

वायुमंडल की शुचिता को बनाए रखने के लिए प्रकृति के इस पर्व को प्राचीन काल से मनाया जाता है। लेकिन इस साल हरियाली अमावस्या की तिथि को लेकर उलझन बनी हुई है। 

दरअसल, 31 जुलाई को अमावस्या सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो रही है। इसके बाद अमावस्या तिथि 1 अगस्त को सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर समाप्त हो रही है।

इस स्थिति में ज्योतिषियों के अनुसार सूर्योदय व्यापिनी तिथि को ही महत्व दिया गया है। इस स्थिति में 1 अगस्त को सूर्योदय के बाद पौधरोपण और पूजन-अर्चन करने से सौभाग्य की प्राप्ति होगी।
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कई गुना फल की प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष रूप से पीपल, वट, केला, आम, तुलसी, नीम आदि पौधों का रोपण करना चाहिए। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं उदय शंकर भट्ट का कहना है कि वेद-पुराणों में पेड़-पौधों में देवताओं का वास बताया गया है।
 
गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि मैं वृक्षों में पीपल हूं। आम, नीम, आंवला को देवी का स्वरूप माना जाता है। बेल वृक्ष में भगवान शिव और लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसी तरह बरगद में त्रिदेवों का वास माना जाता है। 
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