प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति से कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए एक अन्य मार्ग खोलने की मांग पर उत्तराखंड सरकार को ऐतराज है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि कैलास मानसरोवर यात्रा का वर्तमान मार्ग न सिर्फ पौराणिक और धार्मिक महत्व रखता है बल्कि उत्तराखंड केस्वाभिमान से भी जुड़ा है।
रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री से निवेदन है कि भारत इस मुद्दे पर जोर न दें। केंद्र सरकार यात्रा मार्ग के अलावा अगर व्यापारिक दृष्टि से अन्य मार्ग खोलने की बात करती है तो उचित है।
प्रधानमंत्री को पत्र लिखा
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की ब्रिक्स देशों केशिखर सम्मेलन की सफलता और ब्रिक्स बैंक जैसे मुद्दों व नए रिश्तों का स्वागत और बधाई दी है।
जबकि चीन से मानसरोवर यात्रा केलिए एक अन्य मार्ग खोलने के आग्रह को गैरजरूरी ठहराया है। सीएम का कहना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और तत्कालीन चीन प्रधानमंत्री केबीच करार हुआ था।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सीएम ने कहा है कि ब्रिक्स में दिए आपके एक भाषण के अंश से उत्तराखंड की जनता और शिव भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
परंपरागत मार्ग का उल्लेख
वर्तमान में कैलाश यात्री उत्तराखंड के जिस मार्ग से होकर जाते हैं उसका पौराणिक व धार्मिक महत्व है। साधू-महात्माओं ने भी धारचूला-शियालेख होकर जाने वाली यात्रा को ही तीर्थ मार्ग ठहराया है। जिसके बीच में छोटा कैलाश, ओम पर्वत आदि के दर्शन शामिल हैं।
राहुल सांकृत्यान ने भी इस मार्ग विश्वास का मार्ग कहा था। ऋषि परमानंद जी महाराज ने 21 बार इसी मार्ग से यात्रा की है। पौराणिक ग्रंथों में भी इस परंपरागत मार्ग का उल्लेख है और इसे शिव तप का हिस्सा माना जाता है।
यह मार्ग दोनों देशों बीच व्यापारिक व सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। ऐसे में किसी अन्य मार्ग को यात्रा केलिए खोलना शास्त्र सम्मत नहीं है।
वैकल्पिक मार्ग खोलने का चीन को प्रस्ताव
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सभी सरकारों ने इस मार्ग को विकसित करने का प्रयास किया है। केंद्र सरकार अगर मदद देती है तो इस मार्ग की अन्य कठिनाईयां भी दूर की जा सकती हैं।
उत्तराखंड का गौरव छीनने की बजाय इस मार्ग को सुगम बनाने की दृष्टि से कमद उठाए जाएं। इस मार्ग का व्यापारिक और सामरिक महत्व भी है।
ब्राजील में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्टपति जी जिंगपिंग से कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्ग खोलने का प्रस्ताव रखा है।
हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला पास से होकर गुजरने वाले मार्ग को मानसरोवर यात्रा के लिए खोले जाने पर दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने चर्चा की।
हिमाचल के किनौर जनपद से गुजरने वाला मार्ग मौजूदा उत्तराखंड के यात्रा मार्ग के मुकाबले कम दूरी का है। शिपकी ला से मानसरोवर 91 किलोमीटर दूर है, जबकि इस ट्रेक पर कुछ हिस्सा सड़क मार्ग का है जो उत्तराखंड की अपेक्षाकृत बेहतर है।