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अब इन दो सीटों पर अपना कब्जा चाहते हैं रावत

Thu, 22 May 2014 03:32 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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मुख्यमंत्री हरीश रावत बदले माहौल में राजनैतिक तौर पर सुरक्षित सीट धारचूला से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
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साथ ही खाली हुई सुरक्षित सीट सोमेश्वर पर भी उनकी निगाह है। मुख्यमंत्री का गणित ठीक बैठा तो विधानसभा की खाली हो रही दो सीटों में एक कांग्रेस के पास आ सकती है।

सुरक्षित सीट सोमेश्वर के विधायक अजट टम्टा सांसद बन गए हैं। लिहाजा कांग्रेस के हारे सांसद प्रदीप टम्टा को विधानसभा में लाने की तैयारी है। पार्टी सोमेश्वर सीट से प्रदीप टम्टा को उम्मीदवार बनाने जा रही है।
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उत्तरांखड में यहां नहीं चली मोदी की लहर

मुख्यमंत्री के धारचूला से लड़ने की तैयारी से साफ है कि विधानसभा की तीन सीटों डोईवाला, सोमेश्वर(सुरक्षित) और धारचूला में उपचुनाव होंगे।

लोकसभा चुनाव में मोदी की लहर जिन सात विधानसभाओं में नहीं चली है उनमें धारचूला भी है। हरीश रावत के लिए समर्पित विधायक हरीश धामी शुरू से ही सीट छोड़ने को तैयार हैं।

धामी का कहना है कि बॉस की सीट मैंने तो न्यौता दे रखा है। जल्द ही हरीश इस सीट से इस्तीफा दे देंगे। हरीश रावत के लिए धारचूला नया नहीं है।

आरक्षित होने से पहले अल्मोड़ा संसदीय सीट से हरीश रावत तीन बार सांसद रहे हैं। रावत चार बार यहां से संसदीय चुनाव हारे जरूर लेकिन धारचूला में हमेशा उन्हें बढ़त मिली है। धारचूला को कांग्रेस के गढ़ के रूप में देखते हैं।

भाजपा से छीनना चाहते हैं सीट

मुख्यमंत्री हर लिहाज से धारचूला को सुरक्षित सीट मान रहे हैं। मुख्यमंत्री सोमेश्वर सुरक्षित सीट पर अपने करीबी प्रदीप टम्टा को लड़ाकर यह सीट भाजपा से छीनना चाहते हैं।

प्रदीप टम्टा सांसद बनने से पहले 2007 में अजट टम्टा केखिलाफ इस सीट से विधानसभा का चुनाव लड़े थे।

अल्मोड़ा में अभी भी मुख्यमंत्री का राजनैतिक सिक्का चलता है इसलिए अपने चहेते प्रदीप टम्टा को उतारकर कांग्रेस विधायकों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं।

रमेश पोखरियाल निशंक के जीतने पर विधानसभा डोईवाला हुई है।
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...तो खतरे में पड़ सकती है मुख्यमंत्री की कुर्सी

लोकसभा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री का निशाना किसी भाजपा विधायक से सीट खाली कराने का था। बताते हैं कि भाजपा के दो विधायक उनके सम्पर्क में थे।

जिन विधायकों के नाम सामने आए थे उनकी विधानसभा में भाजपा ने जमकर बढ़त बनाई है।

मुख्यमंत्री खेमे को डर सता रहा था कि भाजपा से सीट खाली कराकर चुनाव लड़े और मोदी लहर का असर बना रहा तो कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी। अब भाजपा का कोई विधायक भविष्य खराब करने को तैयार नहीं है।

मुख्यमंत्री डोईवाला से चुनाव लड़ सकते थे। डोईवाला उनके लोकसभा क्षेत्र रहे हरिद्वार का हिस्सा है।

लोकसभा चुनाव के नतीजों में डोईवाला विधानसभा में कांग्रेस करीब 21 हजार वोटों से हारी है। ऐसे में मुख्यमंत्री के लिए यहां से लड़ना मुश्किलों भरा था।
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