फेसबुक पेज पर हरीश रावत की पोस्ट खूब वायरल हो रही है। वे लिख रहे हैं कि, ‘गैरसैंण को लेकर कुछ कुचक्र रचा जा रहा है। ऐसा करने वाले भी सामने आ जाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के बयान कि गैरसैंण में ठंड लगती है, से नया विषय उठ खड़ा हुआ है। अब राजनीति में या तो गैरसैंण समर्थक हैं, जो ठंड में भी खड़े होने को तैयार हैं और दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिनको सुविधाएं चाहिएं।
विधायकों से मैंने स्वयं अनुरोध किया है कि उनको गैरसैंण नहीं आना चाहिए, वो विधानसभा में रहें, जनता के बहुत सारे सवाल हैं उनको उठाएं। मगर गैरसैंण के झंडे को ऊंचा उठाकर के रखने वाले लोग इस अवसर पर गैरसैंण में जुटेंगे, क्योंकि यदि हम अपना गुस्सा नहीं दिखाएंगे, अपनी तकलीफ नहीं बताएंगे, तो फिर यह ठंड गैरसैंण के साथ उत्तराखंड के साथ चिपक जाएगी। फिर हर कोई ठंड का बहाना लेकर गैरसैंण और गैरसैंण जैसी जगहों से कन्नी काटने लगेगा। मेरी मजबूरी है कि मुख्यमंत्री के इस बहुत दुखद बयान के बाद मैं चुप बैंठू, यह संभव नहीं है। इसलिए 4 तारीख को मैं सांकेतिक ही सही अपने उपवास के जरिए, अपना विरोध प्रकट करूंगा’।
हरीश डाइटिंग करने जा रहे गैरसैंण : त्रिवेंद्र
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत के गैरसैंण में एक दिवसीय उपवास पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि हरीश रावत बहुत मोटे तगड़े हो गए हैं, इसलिए वे डाइटिंग करने गैरसैंण जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह बयान ऋषिकेश में एक कार्यक्रम के दौरान दिया है।
वहीं, हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश की जीडीपी अगर 32 प्रतिशत है तो बेरोजगारी दर 23.5 प्रतिशत कैसे हो गई। जीडीपी बढ़ने पर रोजगार के अवसर और अधिक बढ़ते हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने नए अर्थशास्त्र के बारे में जानकारी दें और एक कैलकुलेटर भी भेजें। जानकारी और कैलकुलेटर को प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को भेज दूंगा। साथ ही लिखूंगा कि मुख्यमंत्री के अनुसार उत्तराखंड में जीडीपी 32 प्रतिशत है तो देश की जीडीपी 64 प्रतिशत होनी चाहिए।
स्वराज आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में रावत ने कहा कि दुनिया के सभी देशों में जीडीपी गिर रही है, मगर उत्तराखंड पर इसका असर नहीं हो रहा है। कांग्रेस ने अपनी सरकार में कर्ज नहीं लिया लेकिन त्रिवेंद्र सरकार आए दिन बैंक से कर्ज ले रही है। जब जीडीपी इतनी बेहतर है तो कर्ज की जरूरत क्यों पड़ रही है। शराब, खनन, वन, स्टांप और सर्विस सेक्टर से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि नहीं हो रही है। राज्य में राजस्व वृद्धि दर घटकर 12 फीसदी से नीचे चली गई है।
हरीश रावत के अनुसार मनमोहन सरकार के अर्थशास्त्र में आम लोगों के उपभोग की वस्तुओं के दाम गिरते थे जबकि मोदी के अर्थशास्त्र में कॉल दरें ही 50 प्रतिशत तक महंगी हो गईं हैं। तीन माह में गैस के दाम 83 रुपये बढ़े हैं। नासिक में प्याज और राजस्थान में लहसुन पैदा करने वाले किसान उचित कीमत न मिलने के कारण रो रहे हैं। बाजार में प्याज सौ रुपये और लहसुन दो सौ रुपये किलो बिक रहा है। खाद्य तेल 95 रुपये से कम नहीं है। दालों के दाम भी बेकाबू हो गए हैं।