कांग्रेस के मंत्रियों को अपनी ही नहीं आस-पड़ोस की कम से कम तीन सीटों पर कांग्रेस को जिताने का प्रयास करना होगा, कांग्रेस आलाकमान के इस हुक्म के बावजूद हरीश रावत मंत्रीमंडल के ज्यादातर मंत्री अपनी विधानसभाओं में ही सिमटे हुए हैं।
मजेदार बात यह है कि हर मंत्री को किसी न किसी जनपद का प्रभारी भी बनाया गया है, लेकिन पांच वर्षों के दौरान ज्यादातर मंत्रियों के पास उन जनपदों का प्रभार देखने तक की फुरसत नहीं रही। पिछले महीने दिल्ली में हुई एक बैठक के दौरान कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी के सभी मंत्रियों को आस-पास की तीन विधानसभाओं में कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाने में सहयोग करने के निर्देश दिये थे।
इसके बाद ये माना जा रहा था कि मंत्री आसपास की विधानसभाओं के दौरे बढ़ाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मुख्यमंत्री हरीश रावत को छोड़ दें तो सरकार के बाकी मंत्री अपनी विधानसभाओं के मोहपाश में बुरी तरह से जकड़े हुए हैं। पांच साल मंत्री होने के बावजूद वह अपनी विधानसभाओं को लेकर इतने कॉन्फिडेंट नहीं हैं कि उनसे बाहर निकल कर पार्टी को दूसरी सीटों पर मजबूत करने का अभियान चला सकें।
कद्दावर राजनीतिज्ञ डॉ. इंदिरा हृदयेश हल्द्वानी से, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य बाजपुर से, राजेन्द्र भंडारी बदरीनाथ से, प्रीतम सिंह चकराता से, सुरेन्द्र सिंह नेगी कोटद्वार से, दिनेश अग्रवाल धर्मपुर से और नवप्रभात तक विकास नगर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। यही वजह है कि उन्हें लेकर जुमलेबाजी होती है कि वे विधानसभाओं के मंत्री बनकर रह गए हैं।
रविवार को पार्टी प्रभारी अंबिका सोनी जब सभी मंत्रियों से वन टू वन मुखातिब होंगी तो संभवत: वह उनसे आस पास की विधानसभाओं में कांग्रेस की जीत की संभावनाओं पर भी चर्चा करेंगी, तब यह देखना रोचक होगा कि ये मंत्रीगण क्या जवाब देते हैं।