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स्लॉग ओवर में होगा हरीश रावत की बैटिंग का असल टेस्ट

Sun, 05 Feb 2017 01:55 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
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harish rawat
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चुनावी पिच पर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत की असल परीक्षा स्लॉग ओवर’ में होगी। भाजपा के महारथियों के चक्रव्यूह से घिरे हरीश रावत पर टीम मोदी के गेंदबाजी पर आते ही सियासी बाउंसरों की बौछार तेज हो जाएगी। इन बाउंसरों का सामना हरीश किस अंदाज में करेंगे, ये तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस का स्कोर बोर्ड पूरी तरह से उनके प्रदर्शन पर निर्भर है।
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हरिद्वार और किच्छा से नामांकन भरने के बाद हरीश रावत के खाते में ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिलों की अतिरिक्त दौड़ जुड़ गई है। पार्टी का हर प्रत्याशी चाह रहा है कि कम से कम दो मर्तबा सीएम उनके चुनाव क्षेत्र में प्रचार कर जाएं।

मगर कांग्रेस के इलेक्शन कैंपेन के वन मैन आर्मी बनें हरीश कहां-कहां जाएं और किस-किस का प्रचार करें। हर बॉल पर रन लेना है और स्ट्राइक भी अपने पास ही रखनी है। ऐसे में उनका एक पांव हरिद्वार में होता है तो दूसरा किच्छा में। कभी वह रामनगर में रोड शो कर रहे हैं तो कभी चमोली में।
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दूसरे छोर पर नहीं है कोई रेस्ट दिलाने वाला प्लेयर

Harish Rawat rally - फोटो : file photo
टीम में कोई ऐसा प्लेयर नहीं है कि वो एक छोर उसे थमा कर दूसरे इंड पर थोड़ा रेस्ट कर सकें। चुनौती की इस घड़ी में प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय साथ निभाते, लेकिन वह खुद सहसपुर में इतने कठिन मुकाबले में फंसे हैं कि ढील देने का जोखिम नहीं उठा सकते। ऐसा नहीं कि पार्टी में कैंपेन के लिए चेहरे नहीं हैं।

कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश, सुरेन्द्र सिंह नेगी, प्रीतम सिंह सरीखे बड़े नाम हैं, जिन्हें पार्टी ने स्टार प्रचारकों की सूची में रखा है, मगर वे खुद अपने दुर्गों को बचाने की जंग में फंसे हैं।

अभी तक के कैंपेन में विपक्ष हरीश रावत के दांवपेंच से जूझ रहा है। जिस अंदाज में पार्टी की ओर से आचार संहिता को नजरअंदाज करते हुए बेरोजगारी भत्ता कार्ड जारी किया गया उसने जाहिर कर दिया कि मोहब्बत और जंग में ही नहीं चुनाव में भी सब वाजिब है।
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मोदी मैजिक के सहारे भगवा ब्रिगेड

पीएम मोदी - फोटो : self
उधर महारथियों से लैस भगवा बिग्रेड एक बार फिर मोदी मैजिक के सहारे है। हालांकि मोदी बिग्रेड से निपटने के लिए प्रदेश में कांग्रेस की वन मैन आर्मी हरीश रावत की मदद को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी केंद्रीय नेताओं की टीम के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। वोटिंग को 10 दिन बचे हैं, ऐसे में जरा सी ढील भी किसी को भी भारी पड़ सकती है। 

जोखिम भरी है ये रणनीति
सीएम हरीश रावत को चेहरा बनाना बेशक कांग्रेस का रणनीतिक कदम हो, मगर इसमें जोखिम भी कम नहीं है। उन्हें चेहरा बनाए जाने के बाद सांगठनिक स्तर पर गतिविधियां ठहर सी गई हैं। पूरा इलेक्शन कैम्पेन हरीश रावत पर फोकस हो जाने से इसका लाभ पार्टी के दूसरे प्रत्याशियों को नहीं हो पा रहा है। चुनाव के दौरान सक्रिय रहना वाला नेटवर्क पूरी तरह से खाली है।
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