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बेहतर पीएम हो सकते हैं पर नेहरू नहीं हो सकते मोदी: हरीश रावत

Sun, 02 Jul 2017 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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संसद के सेंट्रल हाल में जीएसटी लांचिंग की तुलना आजादी के जश्न से किये जाने की पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आजादी के जश्न की नकल करना दुखद है।
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नरेन्द्र मोदी बेहतरीन प्रधानमंत्री तो हो सकते हैं, लेकिन वह नेहरू नहीं हो सकते। नेहरू की स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है, जो बलिदान और त्याग से जुड़ी है।

उन्होंने कांग्रेस और उन सभी दलों की सराहना की जिन्होंने केंद्र सरकार के आयोजन में शिरकत नहीं की। उन्होंने इसे उनका साहसपूर्ण कदम करार दिया।
हरीश रावत कांग्रेस भवन में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से देश में कई अहम कानून पास हुए। इनमें अस्पृश्यता कानून प्रमुख है, जो सामाजिक क्रांति का उद्घोष था। इसके बाद पंचायती राज कानून, मनरेगा, आरटीआई जैसे महत्वपूर्ण कानून आए। बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
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पंजीकरण में एक साल तक छूट देने की वकालत की

मगर केंद्र सरकार ने किसी भी तरह का जश्न नहीं मनाया। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक आधार पर विरोध नहीं कर रहे। विरोध आधी रात तक चले जश्न का है। उन्होंने जीएसटी में हिमालय राज्यों से भेदभाव का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि इन राज्यों में छोटे व्यापारियों को भी जीएसटी के दायरे में लाया गया है। दूसरे राज्यों में 20 लाख से ऊपर सीमा रखी गई है, जबकि उत्तराखंड में यह सीमा 10 लाख से ऊपर है, जो भेदभावपूर्ण है।

उन्होंने 75 लाख तक टर्न ओवर वाले व्यापारी तबके को पंजीकरण में एक साल तक छूट देने की वकालत की। उन्होंने सवाल किया कि प्रदेश में उद्योगों को टैक्स होली डे में 100 फीसदी छूट थी।

लेकिन जीएसटी में क्या फार्मूला बना है। केंद्र सरकार ने 58 प्रतिशत रि-ईम्बर्स की बात कही है, लेकिन शेष 42 फीसदी कौन वहन करेगा? उन्होंने कहा कि ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब तलाशने के बाद जीएसटी लागू करना चाहिए था।
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