उत्तराखंड में विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर सीबीआई जांच का सामना कर रहे सीएम हरीश रावत ने सीबीआई जांच के तरीके पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।
बीजापुर हाउस में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में लाभार्थी ही आरोपी होता है और उसी के विरुद्ध जांच व कार्रवाई होती है। मगर उनके विरुद्ध जिस बिंदु को लेकर सीबीआई जांच शुरू हुई है, उसमें वे कहीं से भी लाभार्थी नहीं हैं।
दल बदल से भाजपा को लाभ होना था न कि कांग्रेस को। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि स्टिंग ऑपरेशन से पूर्व ही वे सभी बागी विधायकों की सदस्यता खारिज करने के लिए अर्जी लगा चुके थे। ऐसे में उनकी कांग्रेस में वापसी का सवाल ही पैदा नहीं होता था।
सीबीआई जांच पर उठाए सवाल
सीबीअाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीआई जांच में वे पूरा सहयोग कर रहे हैं। दलबदल के मामले में जो भी पात्र शामिल हैं, सभी की जांच होनी जरूरी है। इस पूरे सियासी संकट में किसी तीसरे एक्टर का पूरा हाथ है, जिसके कैरेक्टर की जांच भी सीबीआई को करनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि हॉर्स ट्रेडिंग सीधे तौर पर भाजपा ने की, इसके बावजूद भाजपा नेताओं से अब तक कोई पूछताछ क्यों नहीं हुई। किशोर उपाध्याय के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और आम लोगों के लिए वे चौबीस घंटे उपलब्ध हैं।
मगर यदि अब किसी को प्रोटोकॉल चाहिए तो उसका भी इंतजाम कर दिया जाएगा। लंढौरा में हुए बवाल के बाद महापंचायत के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
साठ साल में प्रदेश से पहला दलित जाएगा राज्यसभा
हरीश रावत
राज्यसभा के लिए किशोर उपाध्याय के बजाए प्रदीप टम्टा के नाम की घोषणा करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्रीय नेतृत्व का फैसला है।
इसके लिए स्वयंवर जैसी व्यवस्था है, जो इसमें चुना जाता है उसे ही चुनाव लड़ाया जाता है। हरीश रावत ने यह भी कहा कि यह गर्व की बात है कि साठ साल में पहली बार उत्तराखंड से कोई दलित व्यक्ति राज्यसभा जाएगा।
ये सवाल उठाए
- राजभवन में विधायकों को लेकर जाने वाली बस की व्यवस्था किसने की?
- चार्टर फ्लाइट किसने बुक कराई और उसका भुगतान किसने किया?
- गुड़गांव में जहां विधायकों को रखा गया उसका भुगतान किसने किया?
- एयरपोर्ट और होटल के सीसीटीवी फुटेज को क्यों नहीं देखती सीबीआई?