उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा राज्य की भाजपा सरकार नया करने के चक्कर में सब उल्टा कर रही है। राज्य की त्रिवेंद्र सरकार ने पेंशन के मामले में एक परिवार से दो लोगों की पेंशन में से एक को खत्म कर दिया। इसे वापस लिया जाना चाहिए।
रविवार को देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि पानी के रेट बढ़ाये गए। इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। यही हालत चारधाम यात्रा में भी देखने को मिला। हररोज कोई न कोई हादसा हो रहा है। हेली सर्विस बदली गई, पंजीकरण की प्रक्रिया बदली गई।
सरकार बनने के बाद बड़ी बड़ी बातें हुईं, डबल इंजन की सरकार ने पेंशन के मामले में एक परिवार से दो लोगों की पेंशन में से एक को खत्म कर दिया। इसे वापस लिया जाना चाहिए। सीनियर सिटीजन को मुफ्त यात्रा के मामले में भी सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।
उत्तराखंड जल शक्ति बन सकता है, लेकिन हम जल संकट से जूझ रहे है। इस मामले में सरकार की और से कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नजर नहीं आ रहे। हरेला का समय आ रहा है। सरकार इसे जरी रखेगी या नहीं। कांग्रेस सरकार के एक साल का मूल्यांकन करेगी, इसलिए अभी आलोचना नही कर रहे।
एनएच 74 के मामले में एसआईटी बनाई थी। नई सरकार ने सीबीआई को जांच देने की संस्तुति की, लेकिन अब दिख रहा है कि हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों का बाहर रखा जा रहा है तो फिर जांच किस बात की कर रहे हैं।
पूर्व सीएम रावत ने कहा 8 जून को विधानसभा के बाहर 10 से 11 बजे तक धरना देंगे। विरोध में सीधे सीधे बोले कि हमें नहीं करना तो ठीक है, लेकिन बहाने ठीक नहीं है। भाजपा के घोषणा पत्र में कहा था कि 15 दिन में गन्ना भुगतान करेंगे, लेकिन अब गन्ने की दूसरी फसल आने को है और अभी तक भुगतान नहीं हुआ। 350 करोड़ से ज्यादा बकाया है। सरकारी मिलो पर ही 100 करोड़ से ज्यादा बकाया है। किसान विरोधी रवैया सरकार का झलक रहा है। कांग्रेस इसके विरोध में आगे आएगी।