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स्टिंग मामले में रावत को राहत पर बागी बन सकते हैं बड़ी आफत

Wed, 20 Jul 2016 02:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत और विजय बहुगुणा - फोटो : amar ujala
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स्टिंग मामले की सुनवाई में मुख्यमंत्री हरीश रावत को मंगलवार को हाईकोर्ट से भले ही फौरी राहत मिल गई हो, लेकिन बागी विधायकों की अर्जी पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई उनकी परेशानी बढ़ा सकती है। अर्जी में अरुणाचल प्रदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि अगर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लंबित है तो वे विधायकों की सदस्यता समाप्त करने का फैसला नहीं ले सकते।
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स्टिंग मामले में कोई फैसला आने के बजाय 20 अगस्त की तारीख मिलना इस मायने में फौरी राहत है कि चौतरफा मुसीबतों में घिरे सीएम हरीश रावत को फिलहाल इस मसले में कुछ समय तो मिल गया। इसके ठीक उलट बागी विधायकों की सदस्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए अर्जी स्वीकार करके रावत की मुसीबत बढ़ा दी है।

अरुणाचल का फैसला कई मायने में उत्तराखंड की परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति थी और इसी को अर्जी में आधार बनाया है। बता दें कि मार्च माह के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी थी। बागी विधायक इसके खिलाफ हाईकोर्ट गए थे, जहां उनकी याचिका खारिज हो गई थी। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए।
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अरुणाचल पर फैसले के बाद ‌बागी विधायकों ने दी है अर्जी

हरक सिंह रावत - फोटो : file photo
वैसे तो सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई की तिथि 24 अगस्त निर्धारित है। पर इसी बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाने से बागी विधायकों ने उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई की अर्जी दी। जिसमें कहा गया कि प्रदेश में विधानसभा का दो दिवसीय सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है।

अगर सत्र शुरू होने से पहले उनकी याचिका पर सुनवाई हो जाती तो बेहतर रहता। अर्जी में यह भी हवाला दिया गया कि विधानसभा अध्यक्ष ने जब उनकी सदस्यता रदद की थी, उस वक्त उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लंबित था। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी अर्जी पर अब बुधवार को सुनवाई होगी।

उधर, नैनीताल हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन की जांच सीबीआई से कराने संबंधी आदेश को वापस लेने के मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त का तिथि नियत कर दी।
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रावत को दस दिन में दाखिल करना होगा जवाब

हरीश रावत - फोटो : पीटीआई
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि उनके खिलाफ जो स्टिंग हुआ और उसमें विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप उन पर लगा, उसमें विधायकों का जिक्र नहीं है। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति वापस ले ली है। इसलिए सीबीआई जांच के आदेश निरस्त किए जाएं। जबकि केंद्र सरकार और सीबीआई ने जवाब दाखिल कर कहा कि जब किसी मामले की सीबीआई जांच के आदेश हो जाते हैं तो राज्य सरकार इसे वापस लेने की संस्तुति नहीं कर सकती।

फिर मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग ऑपरेशन की सीडी फॉरेंसिक जांच में सही पाई गई है। मंगलवार को हुई पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने हरक सिंह रावत को दस दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए और याचिकाकर्ता को इस जवाब का प्रतिशपथ पत्र सात दिन के भीतर देने को कहा है।
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