नीति आयोग कि दिल्ली में होने वाली बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हिस्सा नहीं लिया। यह भी तब जब वह दिल्ली में ही थे। वजह स्पष्ट थी कि कांग्रेस शासित नौ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस बैठक में भाग लेने से पार्टी हाईकमान ने मना कर दिया था। बैठक का एक बड़ा मुद्दा भूमि अधिग्रहण बिल पर मुख्यमंत्रियों की सहमति लेना भी था।
नीति आयोग की बैठक में हिस्सा नहीं लेना वैसे तो कांग्रेस का राजनीतिक फैसला था, लेकिन इसका दूरगामी असर पड़ने की संभावना भी है।
नीति आयोग की बैठक में नहीं जाने का कारण भूमि अधिग्रहण बिल के लिए सहमति बनाया जाना बताया गया है, लेकिन दूसरे मुद्दे भी थे, सवाल यह भी है कि कांग्रेस के नौ मुख्यमंत्री बैठक में शिरकत कर अपनी बात रखते और राज्य की पैरोकारी करते। जब बिल पर बात होती तो असहमति जता सकते थे।
नीति आयोग में कुंभ पर बात हो सकती थी। अभी तक केंद्र ने अर्द्ध कुंभ 2016 के लिए कोई धनराशि नहीं दी, जबकि नासिक कुंभ के लिए पैसा दिया जा चुका है। मगर, भूमि बिल के मसले पर पूरी बैठक का बहिष्कार कर देना कई सवाल खड़े करता है।