पिछड़े राज्यों की तर्ज पर नवसृजित और पर्वतीय राज्यों को विशेष आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह मुद्दा प्रधानमंत्री की मौजूदगी में नई दिल्ली में हुई 11वीं इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक में जोरशोर से उठाया।
इसके अलावा जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों को समवर्ती सूची में शामिल करने, राज्यांश को लेकर गाडगिल फार्मूला अपनाए जाने, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में राज्य को अतिरिक्त बजट देने, राज्य में जिले छोटे होने की वजह से पृथक प्रशासनिक ढांचा न लागू करने की मांग भी मुख्यमंत्री ने प्रमुखता से रखी।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की राज्यों में स्वमेव तैनाती नहीं करने, पुलिस बल के आधुनिकीकरण को केंद्र से अतिरिक्त बजट मुहैया कराने और उत्तराखंड में उच्च गुणवत्ता संवर्द्धन एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की पुरजोर वकालत की। कहा कि योजना आयोग द्वारा उत्तर पूर्वी राज्यों की समस्याओं के निराकरण के लिए एकल इंस्टीट्यूशन स्थापित किए जाने की संस्तुति की गई है, इसी प्रकृति के संस्थागत ढांचे की जरूरत अन्य हिमालयी राज्यों के लिए भी जरूरी है।
पुंछी आयोग की संस्तुतियों पर राज्य का पक्ष रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान में दी गई त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था जन आकांक्षाओं एवं क्षेत्रीय विकास के अनुरूप है, इसलिए ग्राम और जिला स्तर पर द्विस्तरीय पंचायत व्यवस्था के लिए संविधान में संशोधन किए जाने की आयोग की संस्तुति से राज्य सहमत नहीं है।
उत्तराखंड में साक्षरता का स्तर ठीक है, ऐसी स्थिति में पंचायतों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए पंचायतों के कार्य को समझने एवं निष्पादन के लिए पांच वर्ष की अवधि पर्याप्त है। इसलिए राज्य सरकार पंचायतों में पदों और स्थानों में लगातार दो कार्यकाल आरक्षण स्थिर रखे जाने के पक्ष में नहीं है।