चुनाव से पहले तो हल्ला-गुल्ला सुनाई दे रहा था, वह अब गायब है
राज्य के सामने बढ़ती हुई बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती है। चुनाव से पहले तो हल्ला-गुल्ला सुनाई दे रहा था, वह अब गायब है। यूं तो राज्य के शायद सभी प्रमुख विभागों के ढांचे चरमराए हुए हैं, मगर शिक्षा और स्वास्थ्य का ढांचा चिंताजनक स्तर पर चरमरा चुका है। उसको व्यवस्थित करने की दिशा में कोई सशक्त पहल होती नहीं दिखाई दे रही। हमारी रुचि भी यह जानने में है कितने अक्षम लोगों को राज्य सरकार चिन्हित करती है और उनको जबरिया सेवानिवृत्ति पर भेजती है। मगर और भी बहुत सारे कदम हैं, जिसकी राज्य सरकार से अपेक्षा है, वो उठाएं और फ्रंट से लीड करते हुए दिखाई दें।
चुनौतीपूर्ण कार्यों का करूंगा जिक्र
पूर्व सीएम ने कहा कि वह ऐसे कुछ चुनौतीपूर्ण कार्यों का जिक्र करेंगे, जिनको तत्कालीन सरकारों ने राज्य की नौकरशाही के सहयोग से बहुत उल्लेखनीय तरीके से पूरा किया। यदि लिस्ट थोड़ी लंबी होगी तो हो सकता है दो भागों में वह इस तरीके के कार्यों का उल्लेख करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि वह न अनावश्यक रूप से नौकरशाही के निंदक हैं और न प्रशंसक। बेपरवाह नौकरशाही राज्य के हित में अच्छी नहीं होती है और इस समय बहुत सारे नौकरशाह जो सत्ता के नजदीक हैं, बेपरवाह दिखाई दे रहे हैं।