हरिद्वार के शाहपुर शीतलाखेड़ा देसी मदिरा की दुकान में मिलावट करने वाली सामग्री मिलने के बाद जिला आबकारी अधिकारी और सर्किल इंस्पेक्टर पर गाज गिरी है। जिला आबकारी अधिकारी हरीश जोशी को हटाकर उन्हें कुमाऊं ज्वाइंट कमिश्नर आबकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। जबकि, सर्किल इंस्पेक्टर संजय सिंह रावत को निलंबित कर दिया गया है। रावत को ज्वाइंट कमिश्नर आबकारी गढ़वाल कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
मंगलवार देर शाम आबकारी आयुक्त हरीचंद सेमवाल ने यह कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि शाहपुर शीतलाखेड़ा स्थित देसी मदिरा की दुकान में नकली शराब बनाने की शिकायत मिली थी। मामले में जांच की गई तो वहां से बहुत सी ऐसी सामग्री मिली, जिससे इस शिकायत को बल मिला। वहां से ढक्कन, सिरिंज और भारी मात्रा में मिलावटी शराब पाई गई। जांच हुई तो यह भी सामने आया कि इस पूरे मामले में सर्किल-1 इंस्पेक्टर संजय रावत ने लापरवाही बरती। इससे न सिर्फ राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि विभाग की छवि भी धूमिल हुई। समय-समय पर संजय रावत ने इस दुकान का निरीक्षण नहीं किया और न ही कोई कार्रवाई की।
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इसी तरह जिला आबकारी अधिकारी हरीश जोशी ने भी अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक प्रकार से नहीं किया। इससे संबंधित लाइसेंसी का मनोबल बढ़ा और उसने अपने इस कृत्य को जारी रखा। हरीश जोशी के स्थान पर अब देहरादून जिला आबकारी अधिकारी प्रभाशंकर मिश्रा को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। जबकि, संजय रावत के खिलाफ अलग से आरोपपत्र जारी किया जा रहा है।
आबकारी आयुक्त ने बताया कि इन दोनों अधिकारियों ने अपने जिले में कुछ साल पहले हुए शराब कांड से भी सीख नहीं ली। ऐसे में अगर शराब दुकान का लाइसेंसी अपने इन मंशूबों में पूरी तरह से कामयाब हो जाता तो इससे जहरीली शराब जैसा एक और कांड होने की प्रबल संभावना थी।