शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह समारोह किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का आयोजन नहीं है, बल्कि यह युगऋषि आचार्यश्री का खोया-पाया विभाग है, जहां व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है। कहा कि यह सौभाग्य किसी के द्वार पर खड़ा होकर प्रतीक्षा नहीं कर रहा, वरन यह आयोजन स्वयं आपके सौभाग्य का द्वार खोलने का अवसर प्रदान करता है।
इस मौके पर पर्यटन मंत्री स्वामी सतपाल महाराज, दर्जाधारी विनय रुहेला, श्यामवीर सैनी, शोभाराम प्रजापति, नगर विधायक मदन कौशिक, ईडी के पूर्व निदेशक राजेश्वर सिंह, न्यायाधीश परविंदर सिंह, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी संपूर्णानंद, स्वामी वेलु बापू के नारायण राव आदि मौजूद रहे।