फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरिद्वार: सरकार के दावों की खुली पोल, गंगा में अब भी गिर रहा 194 घरों का सीवर

Wed, 07 Oct 2020 10:15 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • हरिद्वार में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के सरकार के दावों की खुली पोल
  • गंगा के किनारे बसे हैं ये घर, सीवर डालना और पिट बनाना भी संभव नहीं
विज्ञापन
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरिद्वार में नमामि गंगे योजना पर करोड़ों रुपये बहाने के बाद भी गंगा को पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त करना संभव नहीं है। अधिकांश नालों को टेप करने के बाद भी कुछ नाले गंगा में जा रहे हैं तो कई परिवारों की गंदगी सीधे गंगा में गिरती है। भूपतवाला से जटवाड़ा पुल तक गंगा के किनारे बसी बस्तियों के 194 परिवारों के घर ऐसे बने हैं कि यहां न तो सीवर लाइन डाली जा सकती है और न पिट बन सकते हैं। 

विज्ञापन


29 सितंबर को एसटीपी और गंगा अवलोकन म्यूजियम के लोकार्पण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को निर्मल गंगा जल में स्नान करवाने का दावा किया था। महाकुंभ के आयोजन को केवल तीन माह बचे हैं, लेकिन अब भी गंगा में कई जगह सीवर गिर रहा है। भूपतवाला, खड़खड़ी, बैरागी कैंप, राजीव नगर बस्ती व लाल मंदिर के पास 194 घरों का सीवर सीधा गंगा में गिर रहा है।

जब केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के समक्ष 219 घरों का सीवर गंगा में गिरने का मामला आया था। तब उन्होंने अधिकारियों को इन घरों को सीवर लाइन से जोड़ने के निर्देश दिए थे। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी और मेलाधिकारी दीपक रावत ने सीवर लाइन की व्यवस्था न होने पर सीवर पिट बनाने के लिए कहा था, लेकिन दो बार दिशा-निर्देश देने के बाद भी नमामि गंगे के अधिकारी केवल 25 घरों को ही सीवर लाइन से जोड़ पाए। 

विज्ञापन

नहीं हुई सीवर लाइनों की सफाई

शहर में सीवर के ओवरफ्लो होने की समस्या बढ़ गई है। गंगा घाटों के पास सीवर ओवरफ्लो होकर घाटों तक पहुंच रहे हैं। लॉकडाउन के बाद से एक बार भी सीवर लाइनों की सफाई नहीं हुई है। हरिद्वार में इस बार बरसात के बाद सीवर लाइनों की सफाई नहीं हुई। सीवर लाइनों में मलबा भरने से आए दिन मेनहोल से ओवरफ्लो हो रहा है। कॉलोनियों और मोहल्लों में सड़क पर बहती गंदगी के चलते लोगों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। गंगा घाटों के पास भी सीवर प्लेटफार्म पर पहुंच रहा है।

इससे आम लोगों के साथ यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। आरटीआई कार्यकर्ता रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन से पहले शहर की सीवर लाइनों की सफाई हुई थी। इसके बाद विभाग ने एक बार भी सीवर लाइनों की सफाई करवाने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने बताया कि सुभाष घाट पर लोगों के घरों की बुनियाद और गंगा घाट के प्लेटफार्म पर सीवर बह रहा है।

अगर जल्द सीवर लाइनों की सफाई नहीं हुई सीवर गंगा में भी गिर सकता है। वहीं जलसंस्थान गंगा अनुरक्षण इकाई के अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने बताया कि विभाग के पास सीवर लाइनों की सफाई के लिए बजट नहीं है। उन्होंने बताया कि आठ अक्तूबर को वह मुख्यालय में बजट के प्रस्ताव भेजेंगे। इसके बाद अगले सप्ताह तक सीवर लाइनों की सफाई का काम शुरू कर दिया जाएगा।
विज्ञापन

मशीनों के लिए भी भेजा गया है प्रस्ताव

इस समय बकेट मशीनों से सभी लाइनों की सफाई होती है। इससे सीवर लाइनों की सफाई के दौरान सड़क को नुकसान पहुंचता है, इसलिए जलसंस्थान गंगा अनुरक्षण इकाई ने कुंभ कार्ययोजना के तहत दो सीवर सकर मशीन की खरीद के लिए प्रस्ताव भेजा है। अगर सीवर सकर मशीन उपलब्ध हो जाती है तो महाकुंभ और उसके बाद भी सीवर लाइन चोक और ओवर फ्लो होने की समस्या पूरी तरह से हल हो जाएगी। 

भूपतवाला से जटवाड़ा पुल तक 219 घरों का सीवर गंगा में गिर रहा है। इनमें 25 घरों को सीवर लाइन से जोड़ दिया गया है। 194 घरों के आसपास सीवर लाइन डालने के लिए जगह ही नहीं है। 
-अजय कुमार, अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान गंगा अनुरक्षण इकाई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें