शहर में सीवर के ओवरफ्लो होने की समस्या बढ़ गई है। गंगा घाटों के पास सीवर ओवरफ्लो होकर घाटों तक पहुंच रहे हैं। लॉकडाउन के बाद से एक बार भी सीवर लाइनों की सफाई नहीं हुई है। हरिद्वार में इस बार बरसात के बाद सीवर लाइनों की सफाई नहीं हुई। सीवर लाइनों में मलबा भरने से आए दिन मेनहोल से ओवरफ्लो हो रहा है। कॉलोनियों और मोहल्लों में सड़क पर बहती गंदगी के चलते लोगों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। गंगा घाटों के पास भी सीवर प्लेटफार्म पर पहुंच रहा है।
इससे आम लोगों के साथ यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। आरटीआई कार्यकर्ता रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन से पहले शहर की सीवर लाइनों की सफाई हुई थी। इसके बाद विभाग ने एक बार भी सीवर लाइनों की सफाई करवाने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने बताया कि सुभाष घाट पर लोगों के घरों की बुनियाद और गंगा घाट के प्लेटफार्म पर सीवर बह रहा है।
अगर जल्द सीवर लाइनों की सफाई नहीं हुई सीवर गंगा में भी गिर सकता है। वहीं जलसंस्थान गंगा अनुरक्षण इकाई के अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने बताया कि विभाग के पास सीवर लाइनों की सफाई के लिए बजट नहीं है। उन्होंने बताया कि आठ अक्तूबर को वह मुख्यालय में बजट के प्रस्ताव भेजेंगे। इसके बाद अगले सप्ताह तक सीवर लाइनों की सफाई का काम शुरू कर दिया जाएगा।
इस समय बकेट मशीनों से सभी लाइनों की सफाई होती है। इससे सीवर लाइनों की सफाई के दौरान सड़क को नुकसान पहुंचता है, इसलिए जलसंस्थान गंगा अनुरक्षण इकाई ने कुंभ कार्ययोजना के तहत दो सीवर सकर मशीन की खरीद के लिए प्रस्ताव भेजा है। अगर सीवर सकर मशीन उपलब्ध हो जाती है तो महाकुंभ और उसके बाद भी सीवर लाइन चोक और ओवर फ्लो होने की समस्या पूरी तरह से हल हो जाएगी।
भूपतवाला से जटवाड़ा पुल तक 219 घरों का सीवर गंगा में गिर रहा है। इनमें 25 घरों को सीवर लाइन से जोड़ दिया गया है। 194 घरों के आसपास सीवर लाइन डालने के लिए जगह ही नहीं है।
-अजय कुमार, अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान गंगा अनुरक्षण इकाई