मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा रक्षा से जुड़ी चार मांगों को नहीं माना जाता है तो वह कुंभ के दौरान अन्न के साथ जल भी छोड़कर अपने प्राण त्यागकर बलिदान दे देंगे। उन्होंने कहा क्योंकि जब सरकार को बलिदान ही चाहिए है तो वह देंगे। अपने जीते जी मैं अब गंगा को बर्बाद होते नहीं देखूंगा।
रविवार को मातृ सदन में पत्रकारों से वार्ता में स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और हाईकोर्ट ने रायवाला से भोगपुर तक गंगा और उसकी सहायक नदियों में खनन पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है।
गंगा और उसकी सहायक नदियों के पांच किलोमीटर के दायरे में स्टोन क्रशर नहीं लगाए जा सकते। पर्यावरण अधिनियम भी इस क्षेत्र में अभी प्रभावी है, इसलिए यहां खनन नहीं किया जा सकता है। बावजूद इन सबके खनन के पट्टे सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन ज्ञानस्वरूप सानंद की गंगा रक्षा संबंधी मांगों को पूरा करने को लेकर आश्रम के ब्रह्मचारी संत आत्मबोधानंद अनशन (तप) कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार की ओर से चारों मांगों समेत तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नहीं हटाया जाता है और पूर्व पुलिस अधिकारी की जांच की फाइल फिर से नहीं खोली जाती है तो वह जल समेत सब कुछ त्याग देंगे और कुंभ के समय में ही अपने प्राणों की बलि दे देंगे। उन्होंने कहा कि कुंभ क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट ने भी खनन पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा रखी है। कुंभ क्षेत्र में तरह-तरह के बहाने बनाकर खनन खोलकर गंगा को नष्ट किया जा रहा है। जिसे वह अब ज्यादा समय तक नहीं देख सकते हैं।
रिपोर्ट बनाने में धोखाधड़ी का आरोप
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि पुलिस प्रशासन की ओर से उनकी सुरक्षा को लेकर भेजी जा रही रिपोर्ट में धोखाधड़ी की जा रही है। उन्हाेंने कहा कि थाने से भेजी गई रिपोर्ट की तिथि कोई और उन्हें सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी में रिपोर्ट भेजने की तिथि कोई दूसरी है। इससे साफ है कि उनकी सुरक्षा रिपोर्ट बनाने में पूरी खेल किया जा रहा है। जिसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है।
आत्मबोधानंद का हालचाल जाना
रविवार को एसडीएम गोपाल सिंह चौहान और नायब तहसीलदार ललित मोहन पोखरियाल ने आश्रम पहुंचकर अनशन (तप) कर रहे ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का हालचाल जाना।