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मातृ सदन के साथ रचा जा रहा बड़ा षड्यंत्र, किसी भी अप्रिय घटना के जिम्मेदार होंगे चार अधिकारी: स्वामी शिवानंद 

Fri, 26 Feb 2021 10:43 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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स्वामी शिवानंद - फोटो : फाइल फोटो
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मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि मातृ सदन के खिलाफ चार बड़े अधिकारी बड़ा षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम के किसी भी संन्यासी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो ये चारों अधिकारी जिमेदार होंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्य सचिव और कोर्ट में भी पत्र भेज जाएंगे। 

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शुक्रवार को जगजीतपुर स्थित आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि मातृ सदन गंगा रक्षा को लेकर आंदोलन करता रहा है। इसलिए खनन माफिया मातृ सदन को नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रचते रहते हैं।

कई बार मातृ सदन पर हमले का प्रयास भी किया जा चुका है। अब फिर से गंगा रक्षा के लिए पूर्व प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ ज्ञानस्वरूप सानंद की मांगों को पूरा कराने के लिए ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने 23 फरवरी से अनशन (तप) शुरू किया गया है। उन्हें चार दिन तप करते हुए पूरे हो चुके हैं। अब पुलिस के दो और प्रशासन के दो अधिकारी मातृ सदन के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि जिसका उदाहरण 23 फरवरी की शाम को उस समय देखने को मिला, जब पूर्व में मातृ सदन की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस कर्मी को आश्रम से पुलिस उठाकर ले गई, जबकि वह पुलिस कर्मी मातृ सदन में आते रहते हैं। इससे प्रतीत होता है कि ऐसी हरकत करके मातृ सदन को डराने का प्रयास किया जा रहा है। रुद्रप्रयाग ट्रांसफर किए गए पुलिस कर्मी को फोन पर बुलाने के साथ ही आश्रम के बाहर से भी ले जाया जा सकता था। 

अच्छा होता अखाड़ों ने श्रद्धालुओं से ली होती सहायता राशि 
कुंभ मेले में अखाड़ों की ओर से लिए गए एक-एक करोड़ रुपये पर स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि अखाड़ों को सरकार की बजाय श्रद्धालुओं से सहायता राशि लेनी चाहिए थी। इसमें वह प्रत्येक श्रद्धालु से सौ रुपये ले सकते थे। इससे भी उनके पास एक-एक करोड़ रुपये हो सकते थे। इसके लिए वह भी श्रद्धालुओं से अपील करते, लेकिन वह स्वयं यह राशि नहीं लेते। श्रद्धालुओं की ओर से लिए जाने वाली सहायता राशि से सरकार का दबाव अखाड़ों पर नहीं रहता और वह कुंभ को दिव्य-भव्य बनाने के लिए काम करते। आज पैसा लेकर अखाड़े शांत होकर कुंभ को नष्ट करने का काम कर रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि साधुओं को धर्म के लिए कारपोरेट कल्चर को छोड़कर साधु संस्कृति में आना चाहिए।

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