गंगा रक्षा संबंधी मांगों को पूरा कराने के लिए आमरण अनशन कर रहे मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने 37 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उधर, परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती बृहस्पतिवार से महज एक गिलास जल ग्रहण करते हुए अनशन जारी रखा।
ब्रह्मलीन पूर्व प्रोफेसर स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की गंगा रक्षा संबंधी मांगों को पूरा कराने के लिए मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 23 फरवरी से अनशन कर रहे थे। उन्होंने मांग पूरी न होने पर आठ मार्च से जल भी त्याग दिया था। 13 मार्च को उनकी हालत बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें रामकृष्ण मिशन अस्पताल कनखल में भर्ती कराया था। उसी दिन से परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अनशन शुरू कर दिया था।
हालत में सुधार होने पर 18 मार्च को आत्मबोधानंद को आश्रम में छोड़ दिया गया था। बृहस्पतिवार सुबह आत्मबोधानंद ने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। उधर, स्वामी शिवानंद सरस्वती का अनशन 20 वें दिन जारी रहा। वह एक अप्रैल से महज एक गिलास जल के सहारे अपना अनशन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि मांगे पूरी न होने पर कुंभ काल में ही वह अपने प्राणों को त्यागने के लिए एक गिलास जल का त्याग भी जल्द कर देंगे।
गंगा रक्षा संबंधी मांगों को पूरा कराने के लिए तप कर रहे शिवानंद
बता दें कि ब्रह्मलीन पूर्व प्रोफेसर ज्ञान स्वरूप सानंद की गंगा रक्षा संबंधी मांगों को पूरा कराने के लिए तप कर रहे मातृसदन के ब्रह्मचारी संत आत्मबोधानंद को प्रशासन ने उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। वहीं, उन्हें उठाने के साथ ही परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अपना तप शुरू कर दिया था।
गंगा रक्षा के लिए आत्मबोधानंद ने जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में 23 फरवरी से अपना तप शुरू कर दिया था। इस तप के दौरान वह नमक, नींबू, शहद के साथ जल भी ग्रहण कर रहे थे, लेकिन मांग न मानने पर आत्मबोधानंद ने आठ मार्च से जल समेत सबकुछ त्याग दिया था।
जिससे उनका वजन गिरने के साथ ही उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ता जा रहा था। उनका वजन 63 किलोग्राम से घटकर 56 किलोग्रमा पर आ गया था। जिससे जल त्याग के छठवें दिन और पूरे तप के 19 वें दिन एसडीएम गोपाल सिंह चौहान व तहसीलदार आशीष घिल्डियाल ने पुलिस के साथ आश्रम में पहुंचकर उन्हें वहां से उठाकर कनखल स्थित रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती करा दिया था।