पूर्व प्रोफेसर ज्ञानस्वरूप सानंद की गंगा रक्षा संबंधी मांगों को पूरा कराने के लिए 23 फरवरी से तप कर रहे मातृसदन आश्रम के ब्रह्मचारी संत आत्मबोधानंद ने पूर्व घोषणा के अनुसार सोमवार से जल भी त्याग दिया है। उन्हें तप करते हुए 13 दिन पूरे हो गए हैं। इस दौरान वह जल के साथ नींबू, शहद और नमक ले रहे हैं, लेकिन आठ मार्च से उन्होंने जल के साथ ही सबकुछ त्याग दिया है।
गंगा रक्षा के लिए आमरण अनशन (तप) कर रहे मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का वजन दो किलो तक कम हो गया है। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि उनको जल त्यागने के लिए मजबूर किया जा रहा है। 27 फरवरी को पहली बार हुए स्वास्थ्य परीक्षण में उनका वजन 63 किलोग्राम था। अब घटकर 61 किलो हो गया है।
गंगा रक्षा के लिए आंदोलन करते हुए अपने प्राण त्यागने वाले प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ ज्ञान स्वरूप सानंद की गंगा संबंधी मांगों को पूरा कराने के लिए मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 23 फरवरी से अनशन कर रहे हैं। इस दौरान वह केवल नींबू, शहद, नमक और जल ग्रहण कर रहे थे।
उन्होंने मांग न मानने पर आठ मार्च से जल भी त्यागने की घोषणा की थी। मातृसदन आश्रम में पत्रकारों से वार्ता के दौरान परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि आत्मबोधानंद की ओर से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ ही भारत के चीफ जस्टिस, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव आदि को पत्र भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से गंगा रक्षा की मांगों को न मानने पर वह जल त्यागने को विवश हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वह गंगा रक्षा के लिए जल त्यागकर अपने प्राण दे देंगे। स्वामी शिवानंद ने कहा कि मातृसदन में आंदोलन चलने के बावजूद भी हर दिन उन क्षेत्रों में भी खनन खोला जा रहा है, जहां पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा हुआ है।
उन्होंने कहा कि मातृ सदन सुरक्षा की रिपोर्ट बनाने से लेकर उन्हें दिए जा रहे पत्रों में खेल किया जा रहा है। अब राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और पर्यावरण मंत्रालय के पत्रों में कानपुर आईआईटी की गंगा में खनन की रिपोर्ट की तारीखें अलग-अलग दर्शाई गई हैं। इन सबके पीछे सरकार और खनन माफिया का बड़ा षड्यंत्र चल रहा है।