संस्था ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रबंधक द्वारा वर्ष 2012 में चतुर्थ श्रेणी नियुक्तियों, चुनावों एवं भूमि संबंधी महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख गायब कर दिए गए, जिससे जांच प्रभावित हुई। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि शासन स्तर पर कई पत्राचार एवं जांच होने के बावजूद प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण के कारण अब तक दोषियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में भाजपा की राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी के भाई आदेश कुमार की भूमिका की भी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए विधि विशेषज्ञ कृष्णकांत ने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह केवल एक शैक्षणिक संस्थान का मामला नहीं, बल्कि राज्य कोष, ग्राम समाज की सार्वजनिक संपत्ति एवं शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा अत्यंत गंभीर प्रकरण है। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर पूर्व में हुई जांचों के बावजूद यदि अब तक आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई है तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संस्था ने कॉलेज प्रबंधक आदेश कुमार एवं प्रबंध समिति के विरुद्ध एसआईटी एवं विजिलेंस जांच, तत्काल एफआईआर, संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने, अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की जांच, सरकारी धन की वसूली तथा दोषियों के विरुद्ध विधि के अनुसार कठोर कार्रवाई की मांग की है।