प्रकरण में ग्राम प्रधान बसंती देवी की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया। उनकी ओर से आरोपों का समुचित खंडन नहीं किया जा सका। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि ग्राम निधि का दुरुपयोग एवं योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता की गई। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शंकरदीप की भूमिका अभिलेखों के रख-रखाव एवं प्रस्तुतीकरण में लापरवाही के रूप में सामने आई है। संबंधित अधिकारी और कार्मिकों की भूमिका भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी में कमी के रूप में पाई गई है।
घोटाला साबित होने पर जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान बसंती देवी को ग्राम पंचायत अकोढ़ा खुर्द को पद से हटाने के आदेश कर दिए हैं। उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में संबंधित धनराशि की वसूली की कार्रवाई भी होगी। जिलाधिकारी ने प्रकरण में संलिप्त अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
निजी जमीन पर बनाई सड़क
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ निर्माण कार्य निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए, जिनमें सार्वजनिक हित की अनदेखी की गई। कई सड़कों का निर्माण निजी भूमि अथवा व्यक्तिगत पहुंच मार्ग के रूप में किया गया, जो नियमों के विरुद्ध है। अनेक स्थानों पर एक ही सड़क को अलग-अलग दर्शाकर भुगतान किया गया।