कहा, स्वीकारता का अर्थ यह नहीं कि जो ज्यादा काम करे। कहा, काम तो सभी ज्यादा करते हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए चाइनीज ट्रेडिशनल मेडिसिन सिस्टम को जितना व्यापक प्रचार प्रसार मिला, उतना हमारी सरकारों ने लीगल तौर पर उसे मान्यता नहीं दी।
कहा, पांच हजार से अधिक जड़ी-बूटी और औषधीय के पेड़ पौधे 25 प्रतिशत भारत में पाए जाते हैं। इन पौधों में अगर 1000 पौधों को हम चाहते हैं तो दुनिया के तीन पार्ट में बांटने पर 67 प्रतिशत तक भारत में जड़ी-बूटी के रूप में भी समृद्ध हैं। चिकित्सा व्यवस्था के तमाम प्रणालियों में भी हम समृद्ध हैं, लेकिन देश में स्वीकार्यता के लिए तमाम संघर्ष करना पड़ता है।
कहा, आज स्वीकार्यता बढ़ी है, लेकिन एक साधारण जनमानस में आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति को गरीब और अशिक्षित लोगों की चिकित्सा पद्धति के रूप में माना जाता रहा है। अब धीरे-धीरे स्वीकार्यता इस तरह बढ़ी है कि आयुर्वेद और वनस्पतियों की ओर लोग लौट कर आ रहे हैं।