महाकुंभ से पहले भूमिगत बिजली लाइन बिछाने के काम में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड, यूपीसीएल ने इसकी दो स्तर पर जांच कराने के बाद ठेकेदार को ही रोड कटिंग का पूरा खर्च वहन करने के आदेश दिए हैं।
दरअसल, हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में करीब 146 किलोमीटर बिजली लाइनें भूमिगत की जा रही हैं। यूपीसीएल का लक्ष्य है कि कुंभ शुरू होने से पहले सभी जगहों पर भूमिगत विद्युत लाइनें काम करना शुरू कर दें। इसके लिए यूपीसीएल ने टेंडर लेने वाले ठेकेदार को भी आवश्यकता पड़ने पर रोड कटिंग और खोदने की विशेष छूट दी थी।
टेंडर में ठेकेदार के लिए शर्त थी कि वह मशीन से बिजली लाइन को भूमिगत करेगा, जबकि रोड कटिंग का खर्च यूपीसीएल वहन करेगा। नियम के हिसाब से ठेकेदार को सात से आठ मीटर की दूरी पर भूमिगत बिजली लाइन के लिए गड्ढे खोदने थे लेकिन उसने बिना मशीन ही शहर की सभी सड़कें खोद डाली। यूपीसीएल तक मामला पहुंचने के बाद हड़कंप मच गया। मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि अब महाकुंभ में बेहद कम समय बचा है। ऐसे में भूमिगत विद्युत लाइन का काम पूरा करके सड़कें भी दुरुस्त करना बड़ी चुनौती है।
यूपीसीएल ने दो स्तर पर कराई जांच
भूमिगत विद्युत लाइन में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद यूपीसीएल ने इसकी जांच बैठाई। जांच समिति ने जो रिपोर्ट दी, इसके आधार पर सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में बनी समिति ने फिजिकल वेरिफिकेशन करते हुए मामले की जांच की। जांच के बाद यह साफ कर दिया गया कि जिस तरह से सड़कें खोदी गई हैं, वैसी सूरत में यूपीसीएल इनका पैसा नहीं देगा। निदेशक प्रोजेक्ट जेएमएस रौथाण ने बताया कि अब ठेकेदार को ही रोड कटिंग का भुगतान करना है।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता ने पहले भी उठाए थे सवाल
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता को जून में एक पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने आठ जून को कलेक्ट्रेट में एडीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक का उल्लेख करते हुए भूमिगत विद्युतीकरण के लिए रोड कटिंग की शर्तों का उल्लेख किया था।
इसमें कहा था कि 33केवी 11 केवी एवं 400केवी की विद्युत लाइनों को भूमिगत एक समय में 100 मीटर रोड कटिंग कर लाइन डाली जाए और उसको ठीक करने के बाद फिर आगे 100 मीटर रोड कटिंग की जाए, लेकिन इस शर्त की धज्जियां उड़ाते हुए यूपीसीएल की कंपनी अपनी मनमानी से काम कर रही है।
हरिद्वार में भूमिगत लाइन डालने के दौरान निर्धारित से ज्यादा सड़क खोदने की दो स्तर पर जांच हो चुकी है। अब इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। रोड कटिंग का पूरा पैसा अब यूपीसीएल नहीं बल्कि संबंधित ठेकेदार को देना होगा। -
एके सिंह, निदेशक एचआर, यूपीसीएल