परी अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर त्रिकाल भवंता भी हरकी पैड़ी पर गंगा पूजन में शामिल होने पहुंची। उनको देखते ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि आग बबूला हो गए। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि यदि त्रिकाल भवंता को पूजन स्थल से हटाया नहीं जाता तो सभी 13 अखाड़ों के संत पूजन में नहीं बैठेंगे। ये सुनकर मेला प्रशासन और पुलिस के हाथ पांव फूल गए। आनन फानन में पुलिस ने त्रिकाल भवंता में पूजा स्थल से हटाया।
परी अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर त्रिकाल भवंता मंगलवार दोपहर को अचानक हरकी पैड़ी पहुंच गई। वे ब्रह्मकुंड पर गंगा पूजन के के लिए बनाए पंडाल में बैठ गई। उनके बगल में पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के श्री महंत रविंद्र पुरी भी बैठे थे। उन्होंने त्रिकाल भवंता की ओर ध्यान नहीं दिया। इस बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की नजर पंडाल में बैठी त्रिकाल भवंता पर पड़ी।
श्री महंत नरेंद्र गिरि का पारा चढ़ गया। वे खड़े हो गए और त्रिकाल भवंता को पूजा स्थल से न हटाने पर गंगा पूजन में शामिल न होने की चेतावनी दे डाली। ये देखते ही सभी अखाड़ों के संत भी खड़े हो गए। पहले पुलिस ने त्रिकाल भवंता को पूजन स्थल से हटाने का प्रयास किया। वे फिर पंडाल के कोने में जाकर बैठ गई। जब पुलिस उनको फिर पूजा स्थल से हटाने लगी तो वे गंगा घाट की पैड़ी पर बैठ गई।
त्रिकाल भवंता ने हाल में प्रेस वार्ता कर नौ अप्रैल तक उनको शाही स्नान के क्रम में शामिल न करने और सभी सुविधाएं न देनेे पर साध्वियों के साथ आत्महत्या करने की चेतावनी दी थी। किसी अनहोनी के आशंका के चलते पुलिस ने त्रिकाल भवंता को घेर लिया। मौके पर अपर मेलाधिकारी हरबीर सिंह ने त्रिकाल भवंता से पूजन स्थल से जाने का अनुरोध किया। त्रिकाल भवंता ने कहा कि वे श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष के निमंत्रण पर गंगा पूजन में शामिल होने आई थीं। पुलिस के साथ काफी देर तक त्रिकाल भवंता की तीखी नोकझोंक हुई। आखिरकार प्रशासन त्रिकाल भवंता को पूजन स्थल से निकालने में कामयाब रहा।
मुझे श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष की ओर से कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के इशारे पर मेला पुलिस और प्रशासन ने एक महिला साध्वी का अपमान किया है। प्रशासन और पुलिस ने बदसलूकी करते हुए मुझे पूजा स्थल से बाहर निकाला। मैं अपमान घूट पीकर लौटी हूं, यदि परी अखाड़े को उसका अधिकार नहीं मिला तो हम बड़ा निर्णय लेंगे।
- त्रिकाल भवंता, आचार्य महामंडलेश्वर, परी अखाड़ा
हरकी पैड़ी के द्वार सभी के लिए खुले हैं। मैंने परी अखाड़े की प्रमुख को गंगा आरती के दर्शन के लिए आमंत्रित किया था। वे 13 अखाड़ों के लिए आरक्षित स्थान पर जाकर बैठ गई। परंपरा अनुसार मुख्यमंत्री, 13 अखाड़े, श्रीगंगा सभा के पदाधिकारी, मेला और पुलिस प्रशासन के अधिकारी ही पूजन कार्यक्रम में शामिल होते हैं।
- प्रदीप झा, अध्यक्ष श्री गंगा सभा