अधिकारिक सूत्रों अनुसार इन छोटे-मोटे चोरों और जेबकतरों की संख्या 1500 से अधिक हो सकती है। ऐसे अपराधियों के हर राज्यों में डोजियर बने होते हैं। इनमें उनका हर प्रकार का विवरण होता है। ऐसे में यदि एक बार इनका डाटा तैयार कर लिया गया तो इंटेलीजेंस और स्थानीय पुलिस इन पर आसानी से नजर रखी जा सकती है।
पड़ोसी राज्यों के पुलिस अधिकारियों के साथ वार्ता में छोटे-बड़े अपराधियों के डोजियर आदान प्रदान करने पर सहमति बनी है। इससे एक बड़ा डाटा बैंक तैयार होगा। जिससे आसानी से इनकी निगरानी की जा सकती है। साथ ही कुंभ जैसे आयोजन में किसी भी प्रकार की छोटी से छोटी घटना को भी रोका जा सकता है।
-अशोक कुमार, डीजीपी, उत्तराखंड