उपनगरी ज्वालापुर से होकर निकली तीन अखाड़ों की पेशवाई ने वर्ष 2010 के महाकुंभ की याद ताजा करा दी। कोरोना संक्रमण का डर भी श्रद्धालुओं को रोक नहीं पाया। पेशवाई देखने के लिए सड़क और छत श्रद्धालुओं से पैक नजर आए।
बृहस्पतिवार को उपनगरी में जूना, अग्नि और किन्नर अखाड़े की पेशवाई का भव्य स्वागत हुआ। पांडेवाला स्थित छावनी में संतों के दर्शन और आशीर्वाद के लिए सुबह से ही लोगों का तांता लग गया। करीब साढ़े तीन बजे धूमधाम से पेशवाई निकली।
सड़कों और छतों पर लोग घंटों से पेशवाई का इंतजार कर रहे थे। पेशवाई निकलते ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंज उठे। भक्तों ने संतों पर फूल बरसाए तो उन्होंने भी हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया। स्वागत इतना भव्य था कि जहां से पेशवाई गुजरी पीछे सड़क पर फूलों का ढेर लग गया।
स्वामी वीरेंद्रानंद का रथ बना आकर्षण का केंद्र
वहीं गुरुवार को जूना अखाड़े की पेशवाई के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद का रथ लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। रथ के आगे उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर लोक कलाकार छोलिया नृत्य कर रहे थे। रथों पर भी गढ़वाल और कुमाऊं के लोक कलाकार नृत्य करते चल रहे थे।
जूना अखाड़ा की पेशवाई में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की निराली छटा दिखी। पेशवाई में पहली बार पाल वंश राजा और शिक्षाविद् स्वामी वीरेंद्रानंद महामंडलेश्वर के रूप में शामिल हुए। रणसिंघा के साथ पेशवाई निकली तो मसकबीन, ढोल दमाऊ और हुड़का की धुन पर हाथों में तलवार थामे छोलिया कलाकार थिरकने लगे।
पीछे खड़े महामंडलेश्वर के शिष्यों ने जय उत्तराखंड और जय भारत के नारे लगाए। अनूठी रथयात्रा देख श्रद्धालु गदगद हो गए। चेहरे पर मधुर मुस्कान के साथ महामंडलेश्वर संतों को आशीर्वाद दे रहे थे। सेल्फी लेने आ रहे लोगों को सुरक्षा बलों ने बमुश्किल किनारे किया।