धर्मनगरी में धर्मशालाओं में सौ रुपये से लेकर कमरों का किराया शुरू होता है। इसमें आराम से डबल बेड पर चार लोग रह सकते हैं। इसके बाद 11 सौ रुपये तक कमरा मिलता है, यह एसी समेत सभी व्यवस्थाओं से लैस होते हैं, जबकि होटलों में आठ सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक डबल बेड वाले कमरे मिलते हैं, लेकिन हालात यह है कि यात्री नहीं होने से आठ सौ रुपये में भी कमरा लेने को कोई तैयार नहीं है। ऐसा यात्रियों की कमी के कारण प्रतिस्पर्धा बढ़ने से है।
कुंभ में एंटीजन से प्रवेश, धर्मशालाओं के लिए आरटीपीसीआर
हरिद्वार प्रशासन की ओर से भी कुंभ मेले में सीमाओं पर एंटीजन टेस्ट से प्रवेश दिया जा रहा है। जबकि धर्मशालाओं और होटलों में ठहरने के लिए आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता है। ऐसे में धर्मशाला संचालक कमरे नहीं दे रहे हैं, लेकिन होटल एसोसिएशन के सदस्य एंटीजन टेस्ट पर कुंभ में प्रवेश के आधार पर कमरा देने का तर्क दे रहे हैं।
कुंभ मेले में प्रशासन की ओर से शुरू से ही श्रद्धालुओं को सकारात्मक की बजाए नकारात्मक संदेश देकर डराने का काम किया है। इसके कारण श्रद्धालु कुंभ नगरी नहीं आ रहे हैं। अगर अब भी श्रद्धालुओं को कुंभ नगरी में लाना है तो सकारात्मक संदेश देना होगा।
-आशुतोष शर्मा, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन
सीमाओं पर एंटीजन टेस्ट कर कुंभ मेले में प्रवेश दिया जा रहा है। जबकि होटल और धर्मशालाओं में ठहरने के लिए आरटीपीसीआर की बाध्यता है। धर्मशालाओं में रुकने के लिए चेकिंग की जा रही है। बिना आरटीपीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट के कमरा देने पर कार्रवाई की प्रावधान है। कुंभ मेले में आने की पूरी छूट दी जाए। जैसे चुनावी सभाओं में दी जा रही है।
-शंकर पांडे, महामंत्री, देवभूमि धर्मशाला प्रबंधक सभा