नोटिस में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के इस फैसले से श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। नोटिस में हरीश रावत से तब के मंत्रिमंडल में शामिल सभी लोगों के साथ हरकी पैड़ी आकर माफी मांगने को कहा गया है। यदि सात दिन की अवधि में वह माफी नहीं मांगते तो संबंधित कोर्ट में उनके खिलाफ वाद दायर किया जाएगा।
मालूम हो कि कुछ महीने पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार आकर इस अध्यादेश को लेकर अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने साधु संतों से लिखित में माफी भी मांगी थी।
तब उन्होंने कहा था कि उनकी गलती को त्रिवेंद्र सरकार चाहे तो सुधार सकती है। पूर्व सीएम हरीश रावत के बयान के बाद शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कानूनी राय मशविरा लेकर जल्द फैसला लेने की बात कही थी।