हरिद्वार में महाकुंभ के आयोजन के अब तीन माह शेष बचे हैं। नहर बंदी होने से महाकुंभ कार्य एक बार फिर रफ्तार पकड़ेंगे। मेलाधिकारी दीपक रावत ने सभी अधिकारियों को समय पर सभी निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे।
इनमें सात गंगा घाट और हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर केबिल पुल के पास निर्माणाधीन पुल भी शामिल था, लेकिन चार घाटों और पुल के निर्माण के लिए नहर बंदी बहुत जरूरी थी।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने बताया कि 25 दिन में सभी घाटों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। वहीं हाईवे निर्माण की कार्यदायी संस्था सैम इंडिया के परियोजना प्रबंधक अजय शर्मा ने बताया कि पुल का एक स्पान बन गया गया है। शेष तीन स्पान एक माह के भीतर बन जाएंगे।
नवरात्र शुरू होते ही हरकी पैड़ी और आसपास के गंगा घाटों पर जल नहीं होने पर तीर्थ पुरोहितों के साथ व्यापारियों ने नाराजगी जताई है। व्यापारियों का कहना है कि इससे आसपास के इलाकों का व्यापार प्रभावित होना तय है। मालूम हो कि हर वर्ष गंगा बंदी दशहरा के दिन ही होती रही है। नवरात्र के नौ दिन तक घाटों पर श्रद्धालुओं को स्नान और पूूजा के लिए पूरा जल मिलता था। इस वर्ष कुंभ कार्यों को देखते हुए दस दिन पहले गंगा बंदी हो गई। शनिवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। हर साल नवरात्र के दौरान हरिद्वार में बंगाली श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इस सीजन को बंगाली सीजन भी कहते हैं।
हालांकि इस साल कोरोना संक्रमण के चलते बंगाली श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने पर संशय है। इसके बाद भी यह उम्मीद है कि दिल्ली एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के श्रद्धालु यहां पहुंच सकते हैं। श्रद्धालुओं को गंगा घाट पर जल नहीं मिलने पर उनको निराश होकर लौटना पड़ेगा।
तीर्थ पुरोहित दिनेश शर्मा, प्रतीक मिश्रपुरी और सौरभ सिखौला ने कहा कि लॉकडाउन के बाद से ही सन्नाटा पसरा था। अनलॉक-5 में लोग आने लगे तो गंगा बंद कर दी है। इससे यहां के कामकाज पर प्रभाव पड़ना तय है।
सिक्के और मूर्तियां उठाने को उतरे लोग
गंगा बंदी होते ही शुक्रवार तड़के से ही हजारों गरीब लोग गंगा घाटों पर उतर गए। दिनभर लोग यहां सोने, चांदी की मूर्ति और सिक्के तलाशते रहे। इस दौरान एक व्यक्ति को गणेश की चांदी की मूर्ति भी गंगा घाट पर मिली। मालूम हो कि गंगा बंदी के तुरंत बाद शहर के बैरागी कैंप, खड़खड़ी, ब्रह्मपुरी और रोड़ीबेलवाला से बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग घाटों पर उतर जाते हैं। दरअसल, श्रद्धालु पूूजा पाठ के दौरान कई बार कीमती सामान गंगा में चढ़ाते हैं। लोग सोने और चांदी की मूर्तियां भी गंगा में बहाते हैं। इनकी तलाश में यह लोग निकलते हैं। शुक्रवार को दिनभर लोग घाटों पर सामान की तलाश करते रहे। बड़ी संख्या में लोगों ने सिक्के भी पाए। इस दौरान एक व्यक्ति को गंगा में गणेश की चांदी की मूर्ति मिली। मूर्ति मिलने की घटना लोगों में चर्चा का विषय बनी रही।
हर साल गंगा बंदी के बाद घाटों पर जगह जगह गंदगी के अंबार दिखाई देते थे। रेलिंग और चैनल पर कपड़े फंसे रहते थे। इस बार काफी कम नजर आए। मालूम हो कि इस साल कोरोना संक्रमण के चलते चारधाम यात्रा और सावन की कांवड़ यात्रा नहीं हुई थी। चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु जब यहां स्नान करते हैं तो अपने पुराने कपड़ों को गंगा में बहा देते हैं। इसी तरह शिव भक्त भी कांवड़ यात्रा शुरू करने पर पुराने कपड़ों को गंगा में बहाते हैं। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में ऐसे शिवभक्त भी आते थे जो अपनी पुरानी कांवड़ लाते थे। इसको भी गंगा में प्रवाहित किया जाता था। इस साल दोनों यात्रा नहीं होने पर गंगा घाटों पर यह गंदगी नहीं दिखाई दे रही है।
बस्तियों की गंदगी गिर रही गंगा में
शहर के अधिकांश नाले टेप होने के बाद गंगा में पहले की तरह गंदगी गिरती हुई नहीं दिखाई दी। अधिकांश नाले सूखे पड़े थे। होटल और आश्रमों के पाइप बंद पड़े हैं। अब केवल गंगा के किनारे की बस्तियों से ही गंदगी गंगा में बह रही है।
रेगुलेटर पुल के पास गंगनहर में मिले दो महिलाओं के शव
गंगनहर बंदी होने से शुक्रवार दोपहर रेगुलेटर पुल ज्वालापुर के पास से गंगनहर से दो अज्ञात महिलाओं के शव बरामद हुए। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर जिला अस्पताल के शवगृह में रखवा दिए हैं। कोतवाली ज्वालापुर के एसएसआई सुनील रावत ने बताया कि शुक्रवार की दोपहर करीब 11 बजे पुलिस को रेगुलेटर पुल के पास गंगनहर में दो महिलाओं के शव होने की सूचना मिली। पुलिस ने दोनों शव को बाहर निकाल लिया। स्थानीय लोगों से महिलाओं की पहचान कराने की कोशिश की गई, लेकिन शिनाख्त नहीं हो सकी। दोनों महिलाओं की उम्र करीब 35 साल बताई जा रही है। एसएसआई ने बताया कि दोनों महिलाओं के शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल के शवगृह में रखवा दिए गए हैं। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो पाएंगे।