बीते साल अक्तूबर को अधिकारियों में तालमेल की कमी के चलते निर्माणाधीन गंगा घाट बह गए थे। दरअसल यूपी सिंचाई विभाग ने रात को अचानक गंगनहर में पानी छोड़ दिया। जबकि उत्तराखंड सिंचाई विभाग केे इसकी खबर तक नहीं लगी। इसके बाद दोनों ही राज्यों के विभाग नुकसान के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार बताने लगे, लेकिन अब महाकुंभ के आयोजन में बेहद कम समय बचा है। ऐसे में अधिकारियों का आपसी तालमेल और अपडेट रहना बहुत जरूरी है।
हाईवे निर्माण के बीच से बड़ा अवरोध हटा
मेला भवन के पास केबिल पुल को हाईवे का बोटल नैक कहा जाता है। यहां सबसे अधिक जाम लगता है। अगर इस पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो तो हाईवे निर्माण के बाद भी जाम की समस्या बनी रहती है। कार्यदायी संस्था सैम इंडिया लगातार पुल निर्माण के अवरोधों को दूर करने का काम कर रही थी।
अगस्त में सिल्ट आने से बैराग बंद करने के दौरान भी कंपनी ने पुल का निर्माण शुरू कर दिया था। तब कंपनी ने पुल स्पान के निर्माण के लिए केवल आठ दिन का समय मांग था, लेकिन उत्तर प्रदेश शासन ने खेतों में सिंचाई का हवाला देते हुए प्रस्ताव को स्वीकृति देने से इनकार कर दिया था।
हरिद्वार में 15 अक्तूबर की मध्यरात्रि को गंगनहर बंद कर दी जाएगी। इस बार उत्तरप्रदेश शासन ने दशहरे के दस दिन पहले गंगनहर को बंद करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री और हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने नहर बंदी के लिए उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखा था।
उत्तर प्रदेश शासन ने सालाना नहर बंदी को लेकर आदेश जारी कर दिए हैं। 15 अक्तूबर को गंगनहर में पानी रोक दिया जाएगा। वहीं दीपावली के ठीक अगले दिन मध्यरात्रि को गंगनहर में पानी छोड़ दिया जाएगा। हरिद्वार में चार घाटों और हाईवे पर एक पुल का निर्माण रुका पड़ा है।
प्रमुख निर्माण कार्य को महाकुंभ तक पूरा करने के लिए केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखा था। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ विक्रांत सैनी ने बताया कि 15 मध्यरात्रि से लेकर 15 नवंबर मध्यरात्रि तक गंगनहर अनुरक्षण कार्यों के लिए बंद रहेगी।