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हरिद्वार में कुंभ आयोजन को लेकर न फैलाएं भ्रांति: महंत हरिगिरि

Tue, 20 Oct 2020 07:16 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • बोले, गुरु बृहस्पति के कुंभ राशि में संक्रमण करने पर बनता है हरिद्वार कुंभ का योग 
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत स्वामी हरिगिरि ने कहा कि कोई कुंभ को लेकर भ्रांति न फैलाए। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार 2022 के स्थान पर हरिद्वार कुंभ 2021 में हो रहा है। 

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उन्होंने कहा कि वास्तविकता तो यह है कि हरिद्वार कुंभ का योग देवताओं के गुरु बृहस्पति के कुंभ राशि में संक्रमण करने पर बनता है। प्राचीन ऋषियों ने पूरे ब्रह्मांड को 360 डिग्री का भाग देकर उसके 12 भाग किए और उन्हें 12 राशियों में बांट दिया।

हमारे नौ ग्रह सूर्य आदि इन्हीं राशि चक्रों से गुजरते हुए विभिन्न योग बनाते हैं। महंत स्वामी हरिगिरि ने कहा कि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार 12 कुंभ होते हैं, जिनमें चार कुंभ भारत में हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में लगते हैं।
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शेष आठ कुंभ देवलोक में होते हैं। इन चार स्थानों पर बृहस्पति के विभिन्न राशियों में संक्रमण और उसमें उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि माना जाता है कि बृहस्पति एक राशि में एक वर्ष रहता है और 12 वर्ष में घूमकर पुन: उसी राशि में पहुंचता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि बृहस्पति 4332.5 दिनों या 11 वर्ष 11 महीने और 27 दिनों में 12 राशियों की परिक्रमा पूरी करता है।

इस तरह 12 वर्षों में साढ़े 50 दिन कम हो जाते हैं और यह कभी-कभी बढ़ते-बढ़ते सातवें और आठवें कुंभ के बीच एक वर्ष के लगभग हो जाती है, इसलिए हर आठवां कुंभ 11 वर्ष बाद होता है।

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