कुंभ योजना के प्रस्तावित कार्यों के लिए 22 मार्च से 10 दिन के लिए गंगनहर बंदी प्रस्तावित की गई है। प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश शासन की अनुमति के लिए भेज दिया गया है।
अक्तूबर में गंगनहर बंदी की अवधि बढ़ाने का उत्तराखंड सिंचाई विभाग का अनुरोध उत्तर प्रदेश शासन ने नहीं माना था।
जिस कारण पांच महीने से गंगनहर पर निर्माणाधीन घाटों का काम बंद पड़ा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुंभ कार्यों की समीक्षा बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ओर से गंगनहर बंदी नहीं होने से घाटों का निर्माण नहीं होने प्रकरण संज्ञान में लाया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री के सचिव ने उत्तर प्रदेश शासन को गंगनहर बंदी के लिए पत्र लिखा।
इस बार गंगनहर बंदी के लिए गंगा सभा ने भी सहमति दे दी है। इसलिए उत्तर प्रदेश शासन से अनुमति मिलने की ज्यादा उम्मीद है। गंगानहर हेड वर्क्स के सहायक अभियंता विक्रांत सैनी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से 22 मार्च की रात से 2 अप्रैल की मध्यरात्रि तक के लिए गंगनहर बंदी का प्रस्ताव शासन को गंगा सभा की सहमति के साथ भेजा चुका है। स्वीकृति उत्तर प्रदेश शासन से ही आनी है।
गंगनहर बंदी में अधूरे घाट तैयार कर देंगे
सिंचाई खंड हरिद्वार के अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने बताया कि 22 मार्च से गंगनहर बंदी की अनुमति मिलने की पूरी उम्मीद है। 10 दिन की गंगनहर बंदी में निर्माणाधीन अधूरे घाटों का निर्माण पूरा करा लिया जाएगा। पानी के लेबर से ऊपर का काम हो चुका है। गंगनहर पर सिंचाई खंड हरिद्वार के कुंभ योजना में गोविंदघाट विस्तार, रामघाट और प्रेमनगर आश्रम घाट का काम अधूरा है। इसके साथ ही हर की पैड़ी में कांगड़ा घाट का विस्तार कार्य होना है। घाटों की मरम्मत, सीढ़ियों की मरम्मत का काम भी कराया जाना है।