केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि सीएम तीरथ सिंह रावत ने देश को महाकुंभ के दिव्य और भव्य आयोजन पर सकारात्मक संदेश दिया है। ये एक बड़ी चुनौती के साथ खुद को साबित करने का अवसर भी है। आशा है कि श्रद्धालु महाकुंभ में पहुंचकर कोविड नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित स्नान करेंगे। हरिद्वार में कोरोना काल में भी आस्था का सबसे बड़ा उत्सव मनाया जाएगा।
शनिवार को मीडिया सेंटर में आयोजित कुंभ योजनाओं के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होने हरिद्वार पहुंचे केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि कोरोना को लेकर देश के लोग अब जागरूक हो चुके हैं। वे अपेक्षा करते हैं कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु कोविड नियमों का पूरा पालन करेंगे। फिर भी श्रद्धालुओं से अपील है कि वे नियमों का पालन करें। डॉ. निशंक ने कहा कि महाकुंभ के दिव्य और भव्य आयोजन के लिए व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने इसी क्रम में 120 करोड़ से अधिक की योजनाओं का लोकार्पण किया है।
वर्ष 2010 के कुंभ से नहीं हो सकती तुलना
डॉ. निशंक ने कहा कि इस समय पूरे विश्व में कोरोना का प्रकोप है। हालांकि, भारत संक्रमण नियंत्रण में विकसित देशों से आगे है। उन्होंने कहा कि हमने प्रभावी कोविड टीका बनाकर पूरे विश्व को चौंका दिया था। कोरोना के चलते उपजे हालात में 2021 के कुंभ की तुलना 2010 के कुंभ से करना गलत होगा।
‘जमीन से जुड़े नेता हैं तीरथ’
डॉ. निशंक ने कहा कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जमीनी नेता हैं। वे एक सामान्य कार्यकर्ता से पहले विधायक, फिर सांसद और अब मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे हैं। राज्य आंदोलन में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि वे अपने देहरादून स्थित आवास से केवल 40 मिनट में हरिद्वार पहुंच गए। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने फोर लेन हाईवे लोकार्पण के कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से महज दो घंटे में हरिद्वार पहुंचने की बात कही थी। सरकार ने अपना वादा पूरा किया है। जल्द ही हरिद्वार में रिंग रोड का सपना भी साकार होगा।
‘मुख्यमंत्री ने महाकुंभ को पाबंदी मुक्त किया’
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि सीएम तीरथ सिंह रावत ने देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए महाकुंभ को पूरी तरह से पाबंदी मुक्त करने का काम किया है। इससे श्रद्धालु अब कुंभ में स्नान के लिए उत्साहित हैं।
भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए थे प्राधिकरण : तीरथ
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि विकास प्राधिकरण भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए थे। विकास के नाम पर अधिकारी अपनी जेबें भर रहे थे। इसलिए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्राधिकरणों को ही खत्म कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बरदाश्त नहीं किया जाएगा।
मेलाधिकारी दीपक रावत और मेला आईजी संजय गुंज्याल ने बैरागी कैंप पहुंचकर अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अणी अखाड़ों में तीनों श्रीमहंतों से मेले की व्यवस्थाओं पर चर्चा की। संतों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की उदासीनता के चलते बैरागी कैंप में भूमि आवंटन और अन्य कार्य नहीं हो पाए थे। जिससे संतों के शिविर नहीं लग पाए। उन्होंने मेला प्रशासन से मांग की कि रात-दिन कार्य करवाकर दस दिन के भीतर सुविधाएं मुहैया कराएं।
श्रीपंच निर्मोही अणी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्र दास ने कहा कि मेला प्रशासन की ओर से संतों के लिए शिविर, बिजली, पानी, शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। जैसे-जैसे वैरागी संत और खालसे आगमन करते हैं उनको भूमि आवंटित की जाए ताकि संत टेंट लगा सकें। उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन को शाही स्नान और बैरागी अखाड़ों की पेशवाई के लिए सड़कों की व्यवस्था ठीक करनी चाहिए। बैरागी कैंप क्षेत्र और तीनों वैष्णव अखाड़ों में सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाए।
अखिल भारतीय श्रीपंच निर्वाणी अणी अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास ने कहा कि बैरागी कैंप क्षेत्र में रोजाना पानी का छिड़काव कराया जाए। धूल मिट्टी से बैरागी कैंप क्षेत्र के संत परेशान हैं। संपूर्ण मेला क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर जमीन को समतल कराया जाए। श्रीपंच दिगंबर अणी अखाड़ा के श्रीमहंत राम किशन दास ने कहा कि संतों को सुविधा मुहैया कराने में मेला प्रशासन पहले ही देर कर चुका है। अब दिन-रात कार्य कर मेले से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं 10 दिन के अंदर मुहैया कराई जाए।
मेला अधिकारी दीपक रावत ने कहा कि तीनों वैष्णव अखाड़ों को भूमि आवंटन हो गया। सड़क, बिजली, पेयजल, शौचालय आदि सुविधाएं प्रदान की जा रही है। कुंभ मेला आईजी संजय गुंज्याल ने कहा कि संतों की सेवा के लिए 24 घंटे तत्पर हैं। इस दौरान जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य, महंत गौरीशंकर दास, महंत रामशरणदास, महंत रामजीदास, महंत रामकिशोर दास शास्त्री, महंत मनीष दास, महामंडलेश्वर भगवानदास खाकी, महंत मोहनदास खाकी, महंत रामप्रवेश दास, महंत हरिदास, महंत ऋषिकुमार दास, महामंडलेश्वर सरजूदास महात्यागी, महामंडलेश्वर आरीदास, महामंडलेश्वर भैयाजी आदि मौजूद रहे।