इस दौरान किसान नेता शासन-प्रशासन पर जमकर बरसे। किसानों का आरोप था कि करीब एक महीने से ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय पर धरना दे रहे हैं, लेकिन आज तक जिलाधिकारी ने एक बार भी किसानों के बीच आकर उनकी बात नहीं सुनी।
उन्होंने कहा कि जब तक बकाया भुगतान नहीं होता, किसानों का धरना हाईवे पर जारी रहेगा। करीब 3.30 बजे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल और सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह चेक लेकर मौके पर पहुंचे। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि डीएम दीपक रावत लगातार किसानों के धरने का संज्ञान ले रहे हैं। साथ ही उनके स्तर से भुगतान के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि इकबालपुर शुगरमिल से जितनी भी चीनी बेची जाएगी, उसके पूरे पैसे से किसानों का भुगतान किया जाएगा। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने इसकी खुद मॉनिटरिंग करने की बात कही। इस दौरान उन्होंने किसान नेताओं को लिब्बरहेड़ी शुगरमिल की ओर से जारी किए गए 14 करोड़ के चेक किसानों को सौंपे। साथ ही कहा कि लक्सर शुगर मिल ने भी 32 करोड़ का भुगतान कर दिया है।
इस तरह दोनों शुगर मिलों ने अब 15 मार्च मार्च तक का बकाया भुगतान कर दिया है। वहीं, आंकड़ों पर नजर डाले तो अब भी किसानों का तीनों शुगर मिलों पर करीब 325 करोड़ का भुगतान बकाया है। प्रशासन की ओर से चेक सौंपने के बाद करीब 5.15 बजे सर्वसम्मति से किसानों ने हाईवे खोल दिया। इस दौरान दिल्ली से आए किसान नेता सरदार बीएम सिंह, उत्तराखंड किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड, पूर्व विधायक अंबरीष कुमार, जिला अध्यक्ष महकार सिंह, जिला पंचायत सदस्य अदनान नवाज खान, किसान क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष कटार सिंह, भगत सिंह वर्मा, राजेंद्र सिंह, संजीव कुमार, पवन त्यागी, गुलफान, भंवर सिंह, धर्मेंद्र, राजपाल सिंह, दीपक पुंडीर, मोहम्मद आजम और मोहम्मद रफी समेत करीब 6000 से अधिक किसान मौजूद रहे।