पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे घटनास्थल पर आने व जाने के लिए बस, बाइक और ऑॅटो का इस्तेमाल करते थे ताकि पुलिस की पकड़ में न आ सकें। उन्होंने बताया कि घटना के बाद पुलिस कारों की तलाशी ज्यादा लेती है, इसलिए वे सार्वजनिक और आपाताकालीन परिवहन वाहनों का इस्तेमाल करते थे।
घटना से पहले बंद कर देते थे फोन
घटना से पहले बदमाश अपने फोन बंद कर देते थे ताकि पुलिस उनके मोबाइल के जरिए उन तक न पहुंच जाए। इसके साथ ही सभी घटना के वक्त खतरनाक हथियारों से लैस होते थे।
बड़ी घटनाएं ही करता था गैंग
दिल्ली की सबसे भीड़भाड़ वाली मार्केट लाजपतनगर में भी ताऊ गैंग घटना को अंजाम दे चुका है। यहां पर गैंग ने करोड़ों रुपये की डकैती डाली थी। डकैती डालने के बद सतीश दूसरे प्रदेशों में भाग जाता था। गैंग आगरा, मथुरा, दिल्ली, फरीदाबाद, हरियाणा, सूरत और गुजरात में लूट व डकैती की घटना को अंजाम दे चुका है।
बोल देना ताऊ गैंग का आदमी हूं
सतीश चौधरी अपने गिरोह के सदस्यों को कहता था कि यदि कोई पुलिस वाला पकड़ें तो बोल देना कि ताऊ गैंग का सदस्य हूं।