कई घंटे की पूछताछ में टूटा बेटा, कबूला जुर्म
एसएसपी ने बताया कि सख्ती से पूछताछ में बेटे के जवाब लगातार उलझते गए। आखिरकार वह टूट गया और उसने स्वीकार किया कि पिता की हत्या उसी ने दोनों दोस्तों के साथ मिलकर करवाई है। पुलिस के मुताबिक मृतक भगवान सिंह रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी थे और उनके पास करोड़ों की संपत्ति थी। बेटे की गलत संगत और आदतों के चलते दोनों के बीच विवाद रहते थे। बेटे ने पिता पर कई बार संपत्ति अपने नाम कराने के लिए दबाव बनाया था, लेकिन मृतक ने साफ मना कर दिया और उसे बेदखल करने तक की चेतावनी दी। इसी रंजिश में बेटे ने हत्या की योजना बनाई।
30 लाख और एक स्कॉर्पियो में दी थी हत्या की सुपारी
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि यशपाल ने अपने दोस्त ललित मोहन उर्फ राजन और शेखर से बात कर पिता की हत्या के बदले 30 लाख और एक स्कॉर्पियो देने का सौदा तय किया था। तीनों ने 29 नवंबर की दोपहर नहर पटरी पर रेकी की और रात में वारदात को अंजाम दिया। रात करीब आठ बजे यशपाल अपने पिता को दोस्त की शादी का झांसा देकर कार से साथ ले गया। जटवाड़ा पुल से आगे बैराज के पास उसके साथी राजन और शेखर पहले से मौजूद थे। योजना के तहत यशपाल ने पिता से गाड़ी रुकवाई और खुद ड्राइवर सीट पर बैठ गया। इसी दौरान राजन को उसने दोस्त बताकर कार में बैठाया।
कार चलने के कुछ ही मिनट बाद राजन ने तमंचे से भगवान सिंह की कनपटी पर दो गोलियां मार दीं। वारदात के बाद राजन मौके से फरार हो गया। कुछ देर बाद बेटे ने घटना को अंजान बताकर 112 पर कॉल कर पुलिस को गुमराह किया। आरोपी यशपाल, ललित मोहन उर्फ राजन, शेखर को धर दबोचा। राजन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा, एक खोखा कारतूस, वारदात के समय पहने कपड़े व जूते उसके किराये के कमरे से बरामद हुए।