एक तरफ बुधवार को पूरा देश आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाएगा। वहीं, धर्मनगरी के रूप में विख्यात हरिद्वार जनपद में छह से 17 वर्ष तक के आठ हजार 165 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से दूर हैं। इन बच्चों ने गरीबी सहित विभिन्न कारणों से स्कूलों जाना छोड़ दिया। विभाग भी अब तक इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से नहीं जोड़ पाया है।
शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार ने बालिका कल्याण, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, सर्वशिक्षा अभियान, साक्षर भारत मिशन सहित विभिन्न योजनाएं शुरू की थीं। विभिन्न क्षेत्रों में अधिकारियों को दायित्व सौंपे गए थे और इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, जिसके बाद हरिद्वार में शिक्षा का स्तर काफी हद तक ऊपर भी उठा। मंत्रियों और अधिकारियों ने एक-दूसरे की पीठ थपथपाई, लेकिन नीति आयोग ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि सहित कई आयामों पर किए गए सर्वें में हरिद्वार को अति पिछड़े जिलों में शामिल किया, जिसने शासन और प्रशासन के सभी दावों और योजनाओं की पोल खोल दी।
आयोग की रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग ने भी एक सर्वे कराया। इसमें सामने आया कि हरिद्वार जनपद के छह ब्लाक में छह से 17 वर्ष के आठ हजार 165 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से दूर हैं। इतने ज्यादा आंकड़े देखकर विभाग भी चौंक गया, लेकिन अब शिक्षा विभाग ने बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है।
ब्लॉक में ड्रापआउट बच्चों की संख्या
बहादराबाद 3417
भगवानपुर 2530
खानपुर 374
लक्सर 686
नारसन 155
रुड़की 1003
फ्लोटिंग जनसंख्या दे रही विभाग को चुनौती
तीर्थस्थल होने और विशाल औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण हजारों लोग रोजी रोटी की तलाश में हरिद्वार आते हैं। यहां के सरकारी स्कूलों में बच्चों का दाखिला भी कराते हैं, लेकिन कुछ समय बाद कई लोग हरिद्वार छोड़कर रोजी रोटी के लिए किसी अन्य जनपद या प्रदेश चले जाते हैं। इससे ये अपने बच्चों के नाम भी स्कूल से कटवा लेते हैं। विभाग के पास भी सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना चुनौती बना है। हालांकि ड्रापआउट बच्चों में अल्पसंख्यक ज्यादा शामिल हैं।
कुछ समय पूर्व अल्पसंख्यक इलाकों में सीडीओ, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 80 ग्राम सभाओं में अभियान चलाया गया था। धर्मगुरुओं से बच्चों को शिक्षा से जुड़वाने के प्रति वार्ता भी की गई थी। इस वर्ष अभिलाषी जनपद में शामिल होने के बाद डोर टू डोर सर्वे किया गया, जिसके बाद बच्चों का एडमिशन कराने का काम जारी है। वहीं, जनपद के लगभग 13 एनआरएफसी सेंटरों में भी बच्चों को पढ़ाने की कवायद जारी है।
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डॉ. आरडी शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार