राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान झूलाघर गोलीकांड में पुलिस और पीएसी की बर्बरता के साक्षी हरि सिंह गुनसोला का सोमवार तड़के कैमल्स बैक रोड स्थित आवास पर निधन हो गया। वे 62 वर्ष के थे। वे कई दिनों से बीमार थे। अपने पीछे पत्नी और पुत्र-पुत्री को छोड़ गए हैं। उनके निधन का समाचार मिलते ही राज्य आंदोलनकारियों में शोक की लहर दौड़ी।
बता दें कि 2 सितंबर 1994 को झूलाघर पर राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान हुए गोलीकांड में पुलिस और पीएसी ने बर्बरता की थी। उस समय फोटोग्राफर हरि सिंह गुनसोला द्वारा खींची गई बर्बरता की एक फोटो देश-विदेश के कई प्रमुख समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इसमें युवा राजेंद्र नेगी के सीने में संगीन घोंपते दिखाई गई थी।
इसके बाद पुलिस ने उनका उत्पीड़न किया। करीब एक पखवाड़े से भी अधिक समय तक वे मसूरी से बाहर रहे। इस गोलीकांड में शहीद हुए आंदोलनकारियों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये और उन्हें शहीद का दर्जा दिलाने में इसी फोटो को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्बरता का बड़ा साक्ष्य माना था।
आंदोलनकारियों के अधिवक्ता एलपी नैथानी ने आंदोलनकारियों की ओर से मुकदमा लड़ा था। जिसमें शहीदों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बतौर मुआवजा दिए गए थे लेकिन आज तक भी राज्य सरकार द्वारा उनका चिन्हीकरण नहीं किया गया था।
हरि सिंह के निधन पर उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष देवी प्रसाद गोदयाल, पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, पूर्व पालिकाध्यक्ष ओपी उनियाल, विजय रमोला, टीकम सिंह रावत, पूरण जुयाल, शूरवीर भंडारी, बिजेंद्र पुंडीर समेत अनेक लोगों ने शोक व्यक्त किया। साथ ही मांग की उनके पुत्र या पुत्री में से एक को सरकारी नौकरी दी जाए।