कालाढूंगी विधानसभा से मौजूदा विधायक बंशीधर भगत को भाजपा का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद इस सीट पर भी बगावत के सुर उठने लगे हैं। बुधवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता हरेंद्र दरम्वाल ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने का एलान किया है। इसके साथ ही भाजपा प्रत्याशी भगत के सामने असंतुष्टों को साधने के साथ ही बगावत कर चुनाव लड़ने वाले नेताओं से भी निपटना चुनौती होगा।
1989 से भाजपा में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रहे दरम्वाल पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। क्षेत्र में अच्छी पकड़ के चलते वह 15 साल तक लगातार आनंदपुर के ग्राम प्रधान भी रह चुके हैं।
इस विधानसभा के देवलचौड़, चांदनी चौक, आनंदपुर, छड़ायल आदि ग्रामीण क्षेत्रों मे भाजपा का अच्छा जनाधार है। पिछले चुनावों में भी भाजपा प्रत्याशी ने इन्हीं क्षेत्रों से अन्य प्रत्याशियों पर अच्छी बढ़त बनाई जो जीत का आधार भी बनी। इन क्षेत्रों में हरेंद्र दरम्वाल की जनता में अच्छी पकड़ भाजपा प्रत्याशी को नुकसान पहुंचा सकती है।
पंचायत चुनावों से चल रहा मनमुटाव
बंशीधर भगत और हरेंद्र दरम्वाल के बीच मनमुटाव पिछले पंचायत चुनावों से चल रहा है। हरेंद्र के चचेरे भाई आनंद दरम्वाल ने हल्द्वानी ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। दरम्वाल का आरोप था कि विधायक होने के बावजूद भी भगत ने उनकी कोई मदद नहीं की।
मैं कई वर्षों से जनता के बीच में हूं। कालाढूंगी विधानसभा में मेरे सैकड़ों समर्थक हैं, उसके साथ ही पूरी विधानसभा में मेरी रिश्तेदारी भी है। इनके आशीर्वाद और समर्थन के बल पर में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हूं।
-हरेंद्र दरम्वाल