याचिका में कई सुलभ विकल्प भी सुझाए
वह मानते है कि शहरी पेड़ और वन न केवल ग्रीन हाउस गैस को समाहित करने का सबसे सरल जीवित इकाइयां है बल्कि शहरों को ठंडा रखने, प्रदूषण से बचाने, पानी को संचित करने, पक्षियों और दूसरे कीट पतंगों के आश्रय के लिए बचाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस याचिका में कई सुलभ विकल्प भी सुझाए हैं। याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे सैकड़ों उदाहरण है, जब पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक रास्ते या मॉडल बनाए गए है।
सुशील पुरोहित ने कहा कि सरकार जिस प्रकार से पेड़ों के कटान की प्रक्रिया को आसान कर रही है, इससे भविष्य में हमारे आसपास पेड़ों की संख्या में भारी कमी होने वाली है और इसका सीधा असर हम सब पर पड़ने वाला है। आम समाज को पेड़ों के प्रति संवेदनशील होना होगा।
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सारिका राणा ने कहा कि इस संबंध में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। शिक्षा के अधिकार की तरह पर्यावरण संरक्षण भी हमारा कानूनी अधिकार होना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से जन्मदिन के मौके पर पेड़ लगाए जाने की अपील की गई।