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Harela: इस माह होगी शहर के पुराने पेड़ों की यात्रा, बेहद रोचक है उत्तराखंड में चल रहा हरेला घी संग्रांद अभियान

Thu, 21 Jul 2022 02:00 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

शिक्षा के अधिकार की तरह पर्यावरण संरक्षण भी कानूनी अधिकार बने। इसी उद्देश्य के साथ इन दिनों हरेला घी संग्रांद महाअभियान चलाया जा रहा है। हरेला घी संग्रांद महाअभियान के छठवें दिन राजधानी में विकास के नाम पर काटे जा रहे पेड़ों की स्मृति में पौधरोपण कर उन्हें नमन किया गया।
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हरेला घी संग्रांद महाअभियान के छठवें दिन पौधरोपण करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरेला घी संग्रांद महाअभियान के छठवें दिन राजधानी में विकास के नाम पर काटे जा रहे पेड़ों की स्मृति में पौधरोपण कर उन्हें नमन किया गया। इस मौके पर स्मृति वन प्रवेश मार्ग पर पर्यावरण कार्यकर्ता आशीष गर्ग और आम नागरिकों द्वारा पौधे भी रोपें गए। संवाद में वक्ताओं ने वकालत की कि शिक्षा के अधिकार की तरह पर्यावरण संरक्षण भी कानूनी अधिकार बने। 
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पौधारोपण के बाद आयोजित संवाद सत्र में  सहस्रधारा मार्ग के चौड़ीकरण के नाम पर 2057 पेड़ों के कटान के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे आशीष गर्ग ने कहा कि दून में जिनका बचपन सत्तर और अस्सी के दशक में बीता है, उनके लिए पेड़ों के बगीचे का बड़ा स्थान रहा है। दून की पहचान में पेड़ों की हरियाली का बड़ा स्थान रहा है।

ऐसे में भारी भरकम पेड़ों का काटा जाना दुखदायी है। उन्होंने कहा कि सह्रसधारा रोड को एक स्मार्ट, उपयोगी और सुरक्षित रोड बनाए जाने के प्रयासों और सुझाव को पीडब्ल्यूडी की सहमति मिल गई थी लेकिन फिर इसे  दरकिरनार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि दून का सामान्य नागरिक होने के नाते वे इससे आहत हुए और जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
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याचिका में कई सुलभ विकल्प भी सुझाए

वह मानते है कि शहरी पेड़ और वन न केवल ग्रीन हाउस गैस को समाहित करने का सबसे सरल जीवित इकाइयां है बल्कि शहरों को ठंडा रखने, प्रदूषण से बचाने, पानी को संचित करने, पक्षियों और दूसरे कीट पतंगों के आश्रय के लिए बचाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस याचिका में कई सुलभ विकल्प भी सुझाए हैं। याचिका  सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे सैकड़ों उदाहरण है, जब पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक रास्ते या मॉडल बनाए गए है।

सुशील पुरोहित ने कहा कि सरकार जिस प्रकार से पेड़ों के कटान की प्रक्रिया को आसान कर रही है, इससे भविष्य में हमारे आसपास पेड़ों की संख्या में भारी कमी होने वाली है और इसका सीधा असर हम सब पर पड़ने वाला है। आम समाज को पेड़ों के प्रति संवेदनशील होना होगा।

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सारिका राणा ने कहा कि इस संबंध में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। शिक्षा के अधिकार की तरह पर्यावरण संरक्षण भी हमारा कानूनी अधिकार होना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से जन्मदिन के मौके पर पेड़ लगाए जाने की अपील की गई।
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