मंत्री पद गंवाना पड़ा था।
वर्ष 2003 में स्व. एनडी तिवारी की सरकार में हरक सिंह को चर्चित जेनी प्रकरण की वजह से मंत्री पद गंवाना पड़ा था। उस वक्त जेनी नाम की महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया था। जेनी ने हरक सिंह रावत पर आरोप लगाते हुए कहा था कि हरक सिंह रावत ही उसके बच्चे के पिता हैं। मामले में डीएनए टेस्ट भी कराया गया था।
अब एक बार मामले ने तूल पकड़ लिया है। जेनी प्रकरण में देहरादून पहुंची महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने साथ हुए कथित घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने पूर्व में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए दोबारा सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। इस दौरान वह भावुक भी हो गई।
महिला ने बताया कि वह अक्तूबर 2002 में देहरादून आई थी। उस समय उसकी उम्र 16 साल थी। उसने कहा कि वह यमुना कॉलोनी में करीब दो महीने रही थी। महिला का आरोप है कि पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने कहा कि हरक सिंह रावत उस समय सत्ता में थे और उनके प्रभाव के चलते उसे कहीं से मदद नहीं मिली।
बेटे का टेस्ट ही नहीं हुआ
महिला ने आरोप लगाया कि उसे पागलखाने में डाल दिया गया था। वह गर्भवती थी और उसके साथ बहुत कुछ हुआ, लेकिन किसी ने उसका साथ नहीं दिया। उसने कहा कि उसे धमकाकर वहां से बाहर निकाल दिया गया और जिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, उसने कर दिए। महिला के मुताबिक, सीबीआई की टीम उससे पागलखाने में मिलने केवल एक बार आई थी।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला ने कहा कि उसे हिंदी नहीं आती थी और उसके साथ जो हुआ, वैसा किसी और के साथ नहीं हुआ होगा। उसने मामले की दोबारा सीबीआई जांच कराने और डीएनए टेस्ट फिर से कराने की मांग की। उसका सवाल था कि जब उसके बेटे का टेस्ट ही नहीं हुआ तो डीएनए टेस्ट कैसे हुआ? उसने कहा कि उसके बेटे को अपने पिता का नाम चाहिए।
महिला ने बताया कि जब मुख्यमंत्री ने उसका नाम लिया, तब उसने देहरादून आने का फैसला किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वह कई बार भावुक हुई और अपने साथ हुए कथित घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी।