ऊषा की हत्या के बाद उसकी मां अपने दामाद टुकटुक मिस्त्री नरेश पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऊषा की मां (नरेश की सास) को पहले से आशंका थी कि उसकी बेटी को नरेश मार डालेगा। आरोप लगाया कि रक्षाबंधन के पहले उसने मारपीट कर ऊषा का मोबाइल तोड़ दिया था।
शुक्रवार सुबह मोर्चरी में शव लेने के लिए राजीवनगर बिंदुखत्ता से ऊषा की मां लक्ष्मी और बहन प्रेमा, भाई प्रेम सिंह बिष्ट आए थे। मां लक्ष्मी ने बताया कि उसकी बेटी ऊषा रक्षाबंधन के दिन घर आई थी। बेटी ने बताया कि उसका पति मारपीट करता है। झगड़ा होने पर उसने मारपीट कर मोबाइल भी तोड़ दिया था। उसकी पहली पत्नी का बड़ा बेटा पिता से मिलने के लिए आता है। रात में वह पहली पत्नी का बेटा सोता नहीं था।
मां ने आशंका जताई कि नरेश और उसका बेटा मिलकर उसे मार भी सकते हैं। इस कारण नरेश के पास जाना ठीक नहीं है। पहली पत्नी से उसका नाता तोड़वाना होगा। मां का आरोप यह भी था कि चार साल पहले बेटी नरेश के साथ घर छोड़कर भाग गई थी। बेटा होने पर भी घर आई थी। उसने बेटी को मायके से जाने से मना किया तो नरेश ने उसको भी मारने की धमकी दी। उस समय नरेश की नियत ठीक नहीं लगी। यदि बेटी उसका कहना मान जाती तो ऐसा दिन देखना नहीं पड़ता और उसकी जान बच सकती थी।
बेटे को अनाथालय में भेजने की गुहार लगाई
ऊषा की मां लक्ष्मी देवी का कहना है कि उसका दामाद नरेश ठीक व्यक्ति नहीं है। ऊषा का बेटा जय तीन साल का है। पिता उसे भी मार डालेगा। जिला प्रशासन को बेटे को बालिग होने तक अनाथालय में डाल देना चाहिए। अभी नरेश की पहली पत्नी शांत नहीं बैठेगी। अब खतरा मासूम जय पर है। घटना के बाद नरेश सूचना देना तो दूर, उससे नजर मिलाने तक नहीं आया है।
मासूम ढूंढता रहा मां, महिला कांस्टेबल ने बहलाया
उषा का तीन साल का बेटा जय उस समय घर में नहीं था, जब उसकी हत्या हुई थी। उसकी मां उसे पड़ोस में एक घर छोड़ कर आई थी। मासूम को पता ही नहीं कि उसकी मां अब वापस कभी लौट के नहीं आएगी। परिवार का एक परिचित उसे अपनी गोद में लेकर बहला रहा था। एक ही कमरे का घर है। इसलिए घर के बाहर खड़े टुकटुक में उसे सुलाने की कोशिश की, जब वह नहीं सोया तो महिला कांस्टेबल ने बच्चे को बहलाया तब जाकर उसे नींद आई।