सराफा कारोबारी राजीव वर्मा से बदमाश पहले भी रंगदारी की मांग कर चुके थे। दो दिन पहले राजीव ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। यही नहीं राजीव के भाई को भी काशीपुर स्थित दुकान में जाकर धमकाने और रंगदारी मांगने की बात सामने आई है।
इसी सप्ताह काशीपुर में दो व्यापारियों से लॉरेंस बिश्नोई के नाम से 50-50 लाख रुपये की रंगदारी की मांग के मामले सामने आए थे। अब हल्द्वानी के बड़े सर्राफा कारोबारी पर कुमाऊं ज्वैलर्स के स्वामी रामशरण वर्मा के बेटे पर जानलेवा हमले की कोशिश की गई है। उन्हीं के घर के सामने बदमाशों ने खुलेआम फायरिंग कर दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
राजीव के छोटे भाई संजीव वर्मा का कहना है कि आरोपी मनोज अधिकारी ने कुछ दिन पहले उन्हें भी फोन करके कई बार धमकी दी और कभी एक करोड़ तो कभी पचास लाख रुपये की रंगदारी की मांग की। राजीव ने दो दिन पहले ही रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि उनके एक भाई और हैं जो प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। कुछ दिन पहले उनकी दुकान के अंदर आरोपी अपने दो साथियों के साथ पहुंचा और असलहे मेज पर रखकर धमकी दी थी।
फायर खुलते ही भाई को किया फोन
संजीव वर्मा ने बताया कि वारदात के समय वह घर में ही थे। दुकान से लौटे राजीव गाड़ी की डिग्गी में रखे सामान को निकालने के लिए बाहर निकल ही रहे थे कि गाड़ी के पीछे रुकी एक बाइक पर पीछे बैठे आदमी ने फायर कर दिया। राजीव वापस कार के भीतर चले गए और भाई को फोन किया। गाड़ी में राजीव के साथ उनका दोस्त प्रशांत मौजूद था।
घर पर फोर्स का अंदाजा होता तो शायद दोबारा न पहुंचते बाइक सवार
फायरिंग के बाद राजीव ने सीओ हल्द्वानी को फोन करके सूचना दी। एसपी सिटी हरबंस सिंह, सीओ भूपेंद्र सिंह धौनी, एसओ कोतवाली हरेंद्र चौधरी, एसओ बनभूलपुरा नीरज भाकुनी, एसओ काठगोदाम प्रमोद पाठक व हल्द्वानी के चारों थानों की पुलिस राजीव के घर पहुंच गई। पुलिस अधिकारी घर में बैठकर राजीव से बातचीत कर ही रहे थे कि उसी दौरान एक बाइक पर तीन लोग दोबारा राजीव के घर के पास पहुंचे। बाहर मौजूद सर्राफा व्यापारी और पुलिसकर्मी ने आरोपी को पहचान कर शोर मचा दिया। इस पर पुलिस बाइक सवारों के पीछे लग गई लेकिन उनको पकड़ नहीं सकी।
गाड़ी छोड़ बाइक पर बैठकर छानी गलियां
दूसरी बार में घर के करीब पहुंचे आरोपी जब फरार हुए तो कार के लिए रास्ता न होने पर पुलिस अधिकारियों ने पास ही मौजूद फूड डिलवरी कंपनी के कर्मचारियों की बाइक पर बैठकर आरोपियों का पीछा किया। उसके बाद भी आरोपियों को पुलिस नहीं पकड़ सकी।