ध्यान देते तो शायद बच जाती रूपा की जान
सचिव ने बताया कि न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों का यह अमानवीय कृत्य था। यदि वह उस वक्त ध्यान देते तो शायद रूपा की जान बच जाती। उधर, प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अधिवक्ता की असिस्टेंट करीब आधे घंटे तक कोर्ट के दरवाजे पर ही पड़ी रही, इस दौरान कोर्ट में कामकाज होता रहा और मौजूद न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे अनदेखा कर दिया।
उधर, रूपा की मौत और न्यायिक अफसरों और कर्मियों की अनदेखी से खफा होकर बार एसोसिएशन ने एसीजेएम तृतीय की कोर्ट के बहिष्कार की घोषणा की। बार एसोसिएशन की घोषणा का कचहरी के सभी वकीलों ने समर्थन दिया। इसके बाद एसीजेएम तृतीय की कोर्ट में बुधवार को कोई काम नहीं होने दिया गया। इससे नाराज होकर बार एसोसिएशन की ओर से जिला जज को भी मजिस्ट्रेट को हटाने की मांग की गई है।